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उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: अब डिग्रियों और मार्कशीट पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' का होगा इस्तेमाल

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:12 pm
उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: अब डिग्रियों और मार्कशीट पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' का होगा इस्तेमाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहली बार 'भारत' शब्द वाली डिग्रियां वितरित की जाएंगी।

भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संस्थाओं के सुझावों के बाद, देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों ने अपनी आधिकारिक डिग्रियों और मार्कशीट में 'इंडिया' शब्द को हटाकर 'भारत' का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इस बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी रविवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में देखने को मिलेगी, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के दीक्षांत समारोह में शिरकत करेंगी। इस समारोह में छात्रों को दी जाने वाली सभी डिग्रियों में देश का नाम केवल 'भारत' लिखा होगा। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी वैचारिक पृष्ठभूमि है। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) जैसी संस्थाएं लंबे समय से शिक्षा के 'भारतीयकरण' की वकालत कर रही हैं। इन संस्थाओं का तर्क है कि 'भारत' शब्द हमारी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जबकि 'इंडिया' औपनिवेशिक विरासत को दर्शाता है। जबलपुर का रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय इस पहल को औपचारिक रूप से लागू करने वाले अग्रणी संस्थानों में से एक बन गया है, और माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय भी इसी राह पर चलेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रुचि रखती है। ऑस्ट्रेलिया में हजारों छात्र और पेशेवर भारतीय विश्वविद्यालयों की डिग्रियों के आधार पर माइग्रेशन और रोजगार प्राप्त करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नाम में इस बदलाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) में कोई तकनीकी बाधा नहीं आएगी, क्योंकि आधिकारिक तौर पर 'इंडिया' और 'भारत' दोनों ही संवैधानिक नाम हैं। हालांकि, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य में वीजा प्रक्रियाओं या कौशल मूल्यांकन (Skill Assessment) के दौरान अपनी यूनिवर्सिटी से आधिकारिक स्पष्टीकरण पत्र साथ रखें ताकि किसी भी भ्रम से बचा जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह कदम भारत सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के अनुरूप है, जो स्थानीय भाषाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्राथमिकता देती है। राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा इन डिग्रियों का वितरण इस बदलाव को एक राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करता है। आलोचकों का कहना है कि यह केवल प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि समर्थकों का मानना है कि यह देश के युवाओं में अपनी जड़ों के प्रति गर्व की भावना पैदा करेगा। कुल मिलाकर, शिक्षा के क्षेत्र में 'भारत' की बढ़ती स्वीकार्यता इस बात का संकेत है कि भारत अपनी वैश्विक पहचान को अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे एनआरआई (NRI) समुदाय के लिए, यह अपनी मातृभूमि में हो रहे भाषाई और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को समझने का एक नया अवसर है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए अपनी डिग्रियों पर 'भारत' देखना एक भावनात्मक बदलाव भी हो सकता है।
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