राजनीति
भरत तिवारी एनकाउंटर केस: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिए न्यायिक जांच के आदेश, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे पड़ताल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:44 pm
बिहार सरकार ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा फैसला लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज इस घटना की निष्पक्षता से जांच करेंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश जारी किए हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करेंगे। यह निर्णय मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक दबाव के बाद आया है, जिसमें पुलिसिया कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच का मुख्य उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ पड़ताल करना है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि भरत तिवारी की कथित एनकाउंटर में मौत के बाद से ही राज्य की राजनीति गरमाई हुई थी। शुरुआती पुलिस रिपोर्टों में इसे एक मुठभेड़ बताया गया था, लेकिन स्थानीय मीडिया और स्वतंत्र जांचों ने पुलिस के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में इस घटना के पीछे जिम्मेदार चार मुख्य चेहरों का खुलासा किया गया था और पुलिस द्वारा पेश किए गए पांच प्रमुख दावों की हकीकत को उजागर किया गया था। इन्ही खुलासों के बाद सरकार को इस मामले में रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा और अंततः न्यायिक जांच का रास्ता चुनना पड़ा।
सम्राट चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की कानून-विरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी, चाहे वह अपराधियों द्वारा हो या कानून के रखवालों द्वारा। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिटायर्ड जज की अगुवाई में होने वाली यह जांच तथ्यों पर आधारित होगी और यदि कोई पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम जनता के बीच कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल करने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए भारत में कानून का शासन और मानवाधिकारों की रक्षा एक संवेदनशील विषय रहा है। एनकाउंटर संस्कृति पर उठने वाले सवाल और उसके बाद आने वाले न्यायिक आदेशों पर प्रवासी भारतीयों की पैनी नजर रहती है। भारत में पुलिस सुधार और जवाबदेही की मांग विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच अक्सर चर्चा का विषय बनती है। भरत तिवारी मामले में न्यायिक जांच का आदेश देना यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक ढांचे में मीडिया की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की जांच कितनी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, जांच कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जल्द ही मामले के दस्तावेज और साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेंगे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस टीम के बयानों की दोबारा रिकॉर्डिंग की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह वास्तव में एक मुठभेड़ थी या फिर हिरासत में की गई हत्या। इस जांच की रिपोर्ट आने वाले समय में राज्य की पुलिसिंग और राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर डाल सकती है।
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