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राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 14 अगस्त तक ऑनलाइन कक्षाएं, पानी की भारी किल्लत के चलते लिया गया फैसला
ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 10:31 pm

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ) ने जल संकट और संसाधनों के प्रबंधन के कारण 14 अगस्त तक सभी शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
राजस्थान के अजमेर जिले के बांदरसिंदरी स्थित राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ) ने परिसर में जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक कड़ा कदम उठाते हुए सभी शैक्षणिक कक्षाओं को 14 अगस्त, 2024 तक ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय कैंपस में पानी की गंभीर अनुपलब्धता और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए लिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्से भीषण गर्मी और घटते भूजल स्तर के कारण जल संकट से जूझ रहे हैं।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षण कार्य डिजिटल माध्यमों से जारी रहेगा। प्रशासन ने छात्रों को सलाह दी है कि वे इस अवधि के दौरान अपने घरों से ही कक्षाओं में शामिल हों। हालांकि, जो छात्र शोध कार्यों या प्रयोगशाला संबंधी अनिवार्य गतिविधियों में शामिल हैं, उनके लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि वर्तमान में परिसर में पानी की आपूर्ति इतनी कम है कि छात्रावासों में रहने वाले हजारों छात्रों की दैनिक जरूरतों को पूरा करना लगभग असंभव हो गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता का विषय है। कई एनआरआई (NRI) परिवारों के बच्चे या रिश्तेदार उच्च शिक्षा के लिए इन प्रतिष्ठित संस्थानों पर निर्भर हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे राजस्थानी समुदाय के लोगों ने इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बुनियादी ढांचे की ऐसी कमी शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है। यह घटना भारत के शैक्षणिक केंद्रों में जलवायु परिवर्तन और खराब संसाधन प्रबंधन के गहरे संकट को भी रेखांकित करती है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में जलापूर्ति के मुख्य स्रोत सूख चुके हैं और टैंकरों के माध्यम से की जा रही आपूर्ति मांग की तुलना में काफी कम है। छात्रों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी समस्याएं साझा की हैं, जिनमें उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता और पीने के पानी की कमी का उल्लेख किया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि 14 अगस्त के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और यदि मानसून की बारिश से जल स्तर में सुधार होता है, तो भौतिक कक्षाएं फिर से शुरू की जा सकती हैं।
यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान के किसी बड़े शैक्षणिक संस्थान को पर्यावरणीय या बुनियादी ढांचागत समस्याओं के कारण बंद करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए संस्थानों को वाटर हार्वेस्टिंग और दीर्घकालिक जल संरक्षण तकनीकों पर निवेश करने की आवश्यकता है। फिलहाल, विश्वविद्यालय के इस निर्णय से उन छात्रों को राहत मिली है जो पानी की अनुपलब्धता के कारण कठिन परिस्थितियों में रह रहे थे, लेकिन ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
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