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CWG 2026: ज्ञानेश्वरी यादव ने भारोत्तोलन में जीता रजत पदक, नाइजीरियाई प्रतिद्वंद्वी को दी कड़ी टक्कर
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 12:36 pm

भारतीय भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया है, जिससे भारत की पदक तालिका में इजाफा हुआ है।
भारत की उभरती हुई भारोत्तोलन स्टार ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश की झोली में रजत पदक डाल दिया है। ज्ञानेश्वरी का यह प्रदर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भारतीय भारोत्तोलन के बढ़ते प्रभुत्व को भी दर्शाता है। प्रतियोगिता के दौरान ज्ञानेश्वरी ने शुरू से ही अपना दबदबा बनाए रखा, लेकिन स्वर्ण पदक की रेस में नाइजीरियाई एथलीट के साथ उनकी भिड़ंत काफी रोमांचक रही। अंततः, बेहद मामूली अंतर से वह स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन उनकी इस उपलब्धि ने करोड़ों भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
प्रतियोगिता के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो ज्ञानेश्वरी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों श्रेणियों में सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने शुरुआती प्रयासों में ही बढ़त बना ली थी, जिससे विपक्षी खिलाड़ियों पर दबाव साफ देखा जा सकता था। विशेष रूप से नाइजीरियाई प्रतिद्वंद्वी के साथ उनकी 'नेक-टू-नेक' फाइट ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञानेश्वरी की तकनीक और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें इस स्तर पर सफलता दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उनके कोच और सहयोगी स्टाफ ने इस जीत को भारतीय खेलों के लिए एक शुभ संकेत बताया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। गोल्ड कोस्ट 2018 के सफल आयोजन के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर एक अलग ही उत्साह देखा जाता रहा है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में खेल प्रेमी भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन पर बारीक नजर रखते हैं। ज्ञानेश्वरी की इस जीत ने स्थानीय खेल क्लबों और भारतीय मूल के युवाओं को प्रेरित किया है। ICN24 से बात करते हुए सिडनी के एक खेल प्रशंसक ने कहा कि इस तरह की जीत हमें अपनी जड़ों और भारतीय खेल संस्कृति से और मजबूती से जोड़ती है।
ज्ञानेश्वरी यादव का सफर संघर्षों और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखने वाली इस एथलीट ने राष्ट्रीय स्तर पर कई रिकॉर्ड तोड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है। इससे पहले उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित की थी। उनके परिवार और उनके गृह राज्य में इस जीत के बाद जश्न का माहौल है। राज्य सरकार और खेल मंत्रालय ने भी उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है और भविष्य के ओलंपिक खेलों के लिए उन्हें एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रमंडल खेल हमेशा से भारत के लिए पदक जीतने का एक प्रमुख केंद्र रहे हैं, और 2026 के संस्करण में भी भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। ज्ञानेश्वरी के इस रजत पदक ने भारत को पदक तालिका में शीर्ष देशों की कतार में बनाए रखने में मदद की है। अब सबकी निगाहें आने वाली अन्य स्पर्धाओं पर टिकी हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश करेंगे। ज्ञानेश्वरी की यह जीत आने वाले युवा भारोत्तोलकों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी, जो यह बताती है कि कड़ी मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयासों से वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराया जा सकता है।
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