राजनीति
परीक्षा धांधली पर कांग्रेस का केंद्र पर तीखा हमला, भाजपा ने 'राजनीति' करार देकर किया पलटवार
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 02:35 pm

भारत में राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। जहाँ कांग्रेस ने मोदी सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष की साजिश बताया है।
भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में हाल ही में हुए कथित पर्चा लीक (पेपर लीक) और अनियमितताओं के मामलों ने देश में एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। रविवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई। कांग्रेस ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को इन विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की साख पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं ने तर्क दिया कि नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी परीक्षाओं में हुई धांधली ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा संस्थानों में 'विचारधारा विशेष' के लोगों को बिठाने के कारण प्रशासनिक ढांचा चरमरा गया है। पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा ने इन हमलों का कड़ा जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल अफवाहें फैलाकर छात्रों के बीच भ्रम पैदा करना चाहता है। भाजपा नेताओं ने राजस्थान जैसे कांग्रेस शासित रहे राज्यों के पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक की समस्या दशकों पुरानी है और मोदी सरकार ही इसके खिलाफ सख्त कानून लेकर आई है।
इस राजनीतिक घमासान का असर न केवल भारत में बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय पर भी पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-प्रवासी परिवारों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि कई एनआरआई (NRI) छात्र भारत के प्रतिष्ठित मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई अभिभावकों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता कम होती है, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर भारतीय डिग्रियों की साख पर पड़ेगा।
फिलहाल, मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। लेकिन कांग्रेस इस कार्रवाई को 'खानापूर्ति' बता रही है। आने वाले संसद सत्र में इस मुद्दे पर और अधिक गर्मागर्मी होने के आसार हैं। छात्रों और उनके परिवारों की निगाहें अब सरकार के अगले ठोस कदमों पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की सुरक्षा चूक दोबारा न हो और योग्यता के आधार पर ही चयन सुनिश्चित किया जा सके।
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