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डी-डे समारोह में अमेरिकी रक्षा मंत्री की 'आक्रामक विचारधारा' वाली टिप्पणी पर विवाद, फ्रांस में विरोध
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 07:30 am

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा डी-डे समारोह में प्रवासन और विचारधाराओं को लेकर दी गई टिप्पणी ने यूरोप में राजनीतिक घमासान मचा दिया है।
नॉर्मंडी, फ्रांस — द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेनाओं के ऐतिहासिक 'डी-डे' लैंडिंग की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्मारक समारोह में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के संबोधन ने एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है। हेगसेथ ने अपने भाषण में यूरोप में 'खतरनाक विचारधाराओं के आक्रमण' की चेतावनी दी, जिसे कई विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं ने अनियंत्रित प्रवासन (मास माइग्रेशन) पर सीधा हमला माना है।
नॉर्मंडी के तट पर बोलते हुए, जहाँ हजारों सैनिकों ने स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, हेगसेथ ने कहा कि आज का यूरोप एक अलग तरह के खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि पश्चिमी सभ्यता की नींव उन विचारधाराओं से खतरे में है जो राष्ट्रीय संप्रभुता और पारंपरिक सुरक्षा ढांचे को कमजोर करती हैं। उन्होंने नाटो सहयोगियों से अपनी सैन्य तत्परता बढ़ाने और इन उभरते खतरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का आह्वान किया।
हेगसेथ की इन टिप्पणियों का फ्रांस में कड़ा विरोध हो रहा है। स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उन्हें 'पर्सोना नॉन ग्राटा' (अवांछित व्यक्ति) घोषित करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक ऐसे स्थान पर, जो फासीवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक है, विभाजनकारी राजनीति और प्रवासन विरोधी बयानबाजी करना शहीदों के अपमान के समान है। यूरोपीय सरकारों ने भी दबी जुबान में इस लहजे पर आपत्ति जताई है, जिससे वाशिंगटन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच सुरक्षा और प्रवासन नीतियों पर बढ़ते तनाव का पता चलता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और यूरोप दोनों ही वर्तमान में प्रवासन नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदाय अक्सर ऐसी बयानबाजी के प्रभाव को लेकर चिंतित रहते हैं, क्योंकि यह सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हेगसेथ का बयान अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के प्रति बढ़ते झुकाव को दर्शाता है, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय रक्षा समझौतों और वीज़ा नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
विरोध के बावजूद, अमेरिकी रक्षा मंत्री अपने रुख पर अडिग रहे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बलिदानों को आधुनिक समय की स्वतंत्रता की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा का मतलब केवल सीमाएं बचाना नहीं, बल्कि उन मूल्यों की रक्षा करना भी है जिनके लिए पिछली पीढ़ियां लड़ी थीं। यह विवाद एक ऐसे समय में आया है जब प्रवासन का मुद्दा अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों के आगामी चुनावों में एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाला है।
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