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दिल्ली हाईकोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर आज करेगा सुनवाई; निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग

ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 08:35 pm
दिल्ली हाईकोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर आज करेगा सुनवाई; निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग

दिल्ली उच्च न्यायालय सोनम वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें उन्हें सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने की मांग की गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण अपील पर तुरंत सुनवाई करने की सहमति व्यक्त की है। यह अपील एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई है, जिसमें वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर आज ही सुनवाई करने का निर्णय लिया है। डॉ. अंगमो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत और उनकी व्यक्तिगत चिकित्सा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें बेहतर और निजी चिकित्सा सुविधाओं में स्थानांतरित किया जाना आवश्यक है। इससे पहले, एक एकल न्यायाधीश की पीठ ने वांगचुक की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त किया था। अदालत का प्रारंभिक रुख यह था कि सरकारी संस्थानों में उपलब्ध उपचार पर्याप्त है। हालांकि, नई अपील में यह तर्क दिया गया है कि किसी भी नागरिक को अपनी पसंद के डॉक्टर या संस्थान से उपचार कराने का मौलिक अधिकार है, विशेषकर तब जब वह हिरासत जैसी स्थितियों में हो। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर 'चलो दिल्ली' पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। दिल्ली की सीमा पर हिरासत में लिए जाने के बाद से उनकी स्थिति पर देशभर की नजरें बनी हुई हैं। भूख हड़ताल और शारीरिक थकान के कारण उनकी सेहत में गिरावट की खबरें आई थीं, जिसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पर्यावरण और मानवाधिकारों के प्रति जागरूक प्रवासियों के बीच वांगचुक एक सम्मानित चेहरा हैं। लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने के उनके प्रयासों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत में पर्यावरणीय स्थिरता और क्षेत्रीय स्वायत्तता के मुद्दों पर चर्चा करते हैं, जिससे यह अदालती कार्यवाही और भी प्रासंगिक हो जाती है। अदालत के आज के फैसले से यह तय होगा कि क्या वांगचुक को उनके परिवार की इच्छा के अनुसार निजी चिकित्सा देखभाल मिलेगी या उन्हें सरकारी निगरानी में ही रखा जाएगा। यह मामला केवल स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की जिम्मेदारी के बीच के संतुलन को भी रेखांकित करता है।
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