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धार भोजशाला मामला: नमाज व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आज, प्रशासन ने 500 मीटर दूर चिन्हित किए दो वैकल्पिक स्थल

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 08:36 pm
धार भोजशाला मामला: नमाज व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आज, प्रशासन ने 500 मीटर दूर चिन्हित किए दो वैकल्पिक स्थल

धार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला परिसर से 500 मीटर दूर नमाज के लिए दो स्थान चिन्हित किए हैं, जिस पर आज कोर्ट में सुनवाई होगी।

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई से पहले जिला प्रशासन ने सुरक्षा और धार्मिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए अपनी कमर कस ली है। प्रशासन ने परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर नमाज अदा करने के लिए दो सरकारी स्थलों की पहचान की है, जिस पर कोर्ट आज अपने निर्देश जारी कर सकता है। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी कौतूहल का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अपने एक आदेश में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया था कि मुस्लिम समाज के लिए नमाज की उचित और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आदेश के अनुपालन में, जिला प्रशासन ने प्रारंभ में मालीवाड़ा स्थित 'चालीस पीर दरगाह' का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, पिछले शुक्रवार को मुस्लिम समाज का कोई भी व्यक्ति वहां नमाज अदा करने नहीं पहुंचा। समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि प्रस्तावित स्थल उनकी धार्मिक भावनाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। इस असहमति के बाद, प्रशासन ने अब वैकल्पिक स्थलों पर ध्यान केंद्रित किया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि भोजशाला परिसर से 500 मीटर की परिधि में राजस्व विभाग के साथ मिलकर जमीनों का निरीक्षण किया गया है। इसमें डिस्टलरी के पास स्थित खसरा नंबर 509 की सरकारी भूमि को एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सफाई और समतलीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि वे केवल कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रहे हैं ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान हो सके। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया था कि सरकारी तंत्र और दोनों समुदायों के प्रतिनिधि निरंतर संवाद में हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि बातचीत के माध्यम से एक सर्वसम्मत और उपयुक्त स्थान खोज लिया जाएगा। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की ओर से अभी भी प्रशासन के नए प्रस्तावों पर अंतिम सहमति का इंतजार है। वे चाहते हैं कि व्यवस्था ऐसी हो जो लंबे समय तक विवादों से मुक्त रहे। धार का भोजशाला मामला दशकों से संवेदनशील बना हुआ है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। वर्तमान में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के तहत यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई यह स्पष्ट करेगी कि भविष्य में नमाज की व्यवस्था वैकल्पिक स्थल पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होगी या प्रशासन को कोई नया रास्ता निकालना होगा। धार प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता है और वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
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