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अमेरिकी संसद में आव्रजन पर तीखी बहस: रिपब्लिकन सांसद और गवाह के बीच जोरदार झड़प
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 05:01 am
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आव्रजन नीति पर सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसद एंडी बिग्स और एनडीएलओएन के निदेशक क्रिस न्यूमैन के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की एक हालिया सुनवाई के दौरान आव्रजन नीति को लेकर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। रिपब्लिकन सांसद एंडी बिग्स और नेशनल डे लेबरर ऑर्गेनाइजिंग नेटवर्क (NDLON) के कानूनी निदेशक क्रिस न्यूमैन के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों ओर से तीखी बयानबाजी हुई। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सांसद बिग्स ने न्यूमैन से उनके संगठन द्वारा आव्रजन विरोध प्रदर्शनों के वित्तपोषण (funding) को लेकर सीधे सवाल पूछे।
सुनवाई का मुख्य केंद्र यह था कि क्या गैर-लाभकारी संगठन सरकारी या विदेशी धन का उपयोग करके उन प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहे हैं जो अमेरिकी आव्रजन कानूनों को चुनौती देते हैं। सांसद बिग्स ने न्यूमैन पर आरोप लगाया कि उनका संगठन वास्तविकता को छिपा रहा है। जब न्यूमैन ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय तर्क देना शुरू किया, तो बिग्स ने गुस्से में कहा, "बातें बनाना बंद करें!" (Stop making things up)। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करदाताओं का पैसा उन गतिविधियों में जा रहा है जो देश की सीमा सुरक्षा नीतियों के खिलाफ हैं।
क्रिस न्यूमैन ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि उनका संगठन केवल नागरिक अधिकारों और श्रमिकों के हितों के लिए काम करता है। उन्होंने रिपब्लिकन सांसदों पर आव्रजन के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया। न्यूमैन का तर्क था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे अवैध गतिविधियों से जोड़कर देखना गलत है। हालांकि, बिग्स ने पलटवार करते हुए कहा कि पारदर्शिता की कमी के कारण जनता का भरोसा टूट रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस तरह की घटनाएं विशेष महत्व रखती हैं। हालांकि यह मामला अमेरिका का है, लेकिन आव्रजन नीति और उस पर होने वाली राजनीतिक बहस का प्रभाव वैश्विक स्तर पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में भी आव्रजन (Immigration) और छात्र वीजा को लेकर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। भारतीय मूल के लोग, जो ऑस्ट्रेलिया में सबसे तेजी से बढ़ते प्रवासी समुदायों में से एक हैं, अक्सर ऐसी बहसों को करीब से देखते हैं क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर प्रवासियों के प्रति नजरिए को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में आव्रजन पर बढ़ती यह कड़वाहट आगामी चुनावों के मद्देनजर और तेज हो सकती है। जहां एक पक्ष सख्त कानूनों और सीमा नियंत्रण की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष मानवीय आधार और नागरिक अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है। प्रतिनिधि सभा की इस सुनवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि आव्रजन के मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण अभी कम होने वाला नहीं है।
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