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फिफा विश्व कप 2026: डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और कड़े आव्रजन नियमों से फुटबॉल प्रशंसकों में बढ़ी चिंता
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 05:00 am

2026 में होने वाले फीफा विश्व कप की तैयारियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और कड़े आव्रजन नियम खेल प्रेमियों और प्रवासी समुदायों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
फिफा विश्व कप 2026 की तैयारियां अब अपने चरम पर हैं, लेकिन खेल के मैदान से ज्यादा चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में हो रही है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस महाकुंभ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का साया मंडराने लगा है। विशेष रूप से आव्रजन (इमिग्रेशन) और वीजा नियमों को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों, विशेषकर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जैसे प्रवासी समूहों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और सीमाओं पर कड़ाई के रुख ने फीफा और आयोजकों के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। विश्व कप के दौरान लाखों दर्शकों के अमेरिका पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन कड़े वीजा नियमों के कारण कई देशों के प्रशंसकों को प्रवेश मिलने में कठिनाई हो सकती है। मानवाधिकार संगठनों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की विवादास्पद आव्रजन नीतियों के कारण यह टूर्नामेंट केवल एक खेल प्रतियोगिता न रहकर एक राजनीतिक अखाड़ा बन सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। बड़ी संख्या में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक खेल के प्रति जुनूनी हैं और अक्सर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए यात्रा करते हैं। वीजा प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की देरी या जटिलता उनके यात्रा कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, अमेरिका में बढ़ते सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रवासियों के प्रति सख्त रुख ने उन परिवारों को भी दुविधा में डाल दिया है जो इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहते थे।
राजनीतिक चिंताओं के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। टिकटों की आसमान छूती कीमतें और अमेरिका में रहने-खाने के बढ़ते खर्च ने मध्यम वर्गीय प्रशंसकों की जेब पर भारी असर डाला है। फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ट्रंप के बीच करीबी संबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि खेल की स्वायत्तता और समावेशिता को राजनीतिक हितों के लिए दांव पर लगाया जा रहा है।
अंततः, 2026 का विश्व कप केवल फुटबॉल की श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं होगा, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा होगी कि वैश्विक खेल आयोजन राजनीतिक सीमाओं और कड़े आव्रजन कानूनों के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं। खेल प्रेमियों की यही उम्मीद है कि राजनीति खेल भावना पर हावी न हो और दुनिया भर के प्रशंसक बिना किसी भेदभाव के इस उत्सव का आनंद ले सकें।
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