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इस्तीफे के बाद बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू

ICN24 Newsroom 27 जुल॰ 2026, 12:35 pm
इस्तीफे के बाद बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू

बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। कानून मंत्री ने उनके इस्तीफे के ठीक बाद इसकी पुष्टि की है।

ढाका: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है। कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमां ने रविवार को इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार इन आरोपों को गंभीरता से ले रही है। यह घोषणा शहाबुद्दीन द्वारा राष्ट्रपति पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा देने के ठीक दो दिन बाद आई है। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछले शुक्रवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, जिसके लिए उन्होंने गिरते स्वास्थ्य का हवाला दिया था। हालांकि, उनके पद छोड़ने के तुरंत बाद भ्रष्टाचार की जांच की बात सामने आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्तमान में बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत संसद अध्यक्ष (स्पीकर) की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। कानून मंत्री असदुज्जमां ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि पद पर रहते हुए राष्ट्रपति को प्राप्त सुरक्षा कवच अब हट चुका है, जिससे जांच का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। जांच के दायरे में उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े आरोप शामिल हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-प्रशांत और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिनके व्यापारिक या पारिवारिक संबंध उपमहाद्वीप से हैं, इन घटनाक्रमों को करीब से देख रहे हैं। बांग्लादेश में अस्थिरता का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर पड़ता है, जो प्रवासी भारतीयों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च-स्तरीय जांच से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बहाल करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, कार्यवाहक व्यवस्था के तहत शासन का संचालन किया जा रहा है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। शहाबुद्दीन का कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा है और उनके इस्तीफे को देश में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो इस जांच को किस दिशा में ले जाता है और क्या इसमें अन्य शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता भी पाई जाती है।
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