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जिम से रसोई तक पहुंचा प्रोटीन का क्रेज, लेकिन वैश्विक किल्लत ने बढ़ाई 'व्हे प्रोटीन' की कीमतें
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 10:31 am
भारत में व्हे प्रोटीन की मांग में भारी उछाल आया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी के कारण इसकी कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है।
भारत के फिटनेस और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो व्हे प्रोटीन कभी केवल पेशेवर बॉडीबिल्डर्स और एथलीटों के बैग तक सीमित था, वह अब भारतीय रसोई का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। संतुलित आहार और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच, भारत में व्हे प्रोटीन की खपत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हालांकि, इस बढ़ती मांग के बीच एक बड़ी चुनौती सामने आई है—वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण प्रोटीन की कीमतों में भारी उछाल आया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी व्हे प्रोटीन की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। हाल के महीनों में अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कच्चे माल की कमी और रसद (logistics) लागत में वृद्धि ने भारतीय बाजार को सीधे प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले एक साल में व्हे प्रोटीन के विभिन्न ब्रांडों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। यह स्थिति उन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए चिंता का विषय है जिन्होंने हाल ही में अपने दैनिक आहार में प्रोटीन सप्लीमेंट को शामिल किया था।
इस संकट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया एक बड़ा डेयरी निर्यातक देश है, और भारतीय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डेयरी उत्पादों और प्रोटीन सप्लीमेंट्स की मांग लगातार बनी रहती है। वर्तमान में कीमतों में जो उछाल देखा जा रहा है, वह वैश्विक डेयरी बाजार में उतार-चढ़ाव का परिणाम है। ऑस्ट्रेलिया के फिटनेस प्रेमी भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी इन बढ़ती कीमतों का अनुभव कर रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अपनी लागत की भरपाई के लिए वैश्विक स्तर पर दाम बढ़ा रहे हैं।
भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव ने सप्लीमेंट उद्योग को मुख्यधारा में ला दिया है। अब केवल जिम जाने वाले युवा ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग और कामकाजी महिलाएं भी प्रोटीन के महत्व को समझ रहे हैं। भारत में कई स्टार्ट-अप अब घरेलू स्तर पर व्हे प्रोटीन के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके, लेकिन कच्चे माल (Whey concentrate) के लिए अभी भी वैश्विक बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है।
आने वाले महीनों में कीमतों में स्थिरता की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। यदि वैश्विक स्तर पर उत्पादन में सुधार नहीं होता है, तो फिटनेस के प्रति जागरूक भारतीयों को अपनी सेहत के लिए अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय न केवल कीमत, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और लेबल की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बढ़ती कीमतों के दौर में मिलावटी उत्पादों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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