लाइव
राजनीति
राजनीति

नेहरू से मोदी तक: नेतृत्व के व्यक्तित्व ने कैसे बदली भारत की विदेश नीति

ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 06:31 am
नेहरू से मोदी तक: नेतृत्व के व्यक्तित्व ने कैसे बदली भारत की विदेश नीति

भारत की विदेश नीति हमेशा से उसके शीर्ष नेतृत्व के व्यक्तित्व का प्रतिबिंब रही है। जवाहरलाल नेहरू के आदर्शवाद से लेकर नरेंद्र मोदी के व्यावहारिक यथार्थवाद तक, भारत का वैश्विक दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है।

भारत की विदेश नीति के इतिहास पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि देश का वैश्विक दृष्टिकोण न केवल भू-राजनीतिक परिस्थितियों से, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत दर्शन और कार्यशैली से भी गहरे रूप से प्रभावित रहा है। जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक का सफर भारतीय कूटनीति में एक बड़े वैचारिक और रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। जहाँ नेहरू ने स्वतंत्र भारत की नींव आदर्शवाद और गुटनिरपेक्षता पर रखी थी, वहीं मोदी सरकार में कूटनीति 'परिणाम-आधारित' और रणनीतिक स्वायत्तता पर केंद्रित हो गई है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति उनके बौद्धिक व्यक्तित्व और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों का विस्तार थी। शीत युद्ध के दौर में उन्होंने 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य वैश्विक शक्तियों के बीच बिना किसी पक्षपात के अपनी स्वतंत्र आवाज बनाए रखना था। नेहरू की छवि एक विश्व दार्शनिक की थी, जो उपनिवेशवाद विरोधी और एशियाई एकता के प्रबल समर्थक थे। हालांकि, उनके दौर की कूटनीति अक्सर अत्यधिक आदर्शवाद के लिए जानी जाती थी, जिसका प्रभाव 1962 के युद्ध और कश्मीर जैसे मुद्दों पर स्पष्ट दिखा। उस समय ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के संबंध काफी सीमित थे और दोनों देश अलग-अलग खेमों की ओर झुके हुए थे। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति यथार्थवाद (Realism) और सक्रियता पर आधारित है। मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'हिचकिचाहट' को पीछे छोड़ते हुए अपनी राष्ट्रीय शक्ति का प्रदर्शन शुरू किया है। उनकी कूटनीति में व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण स्थान है—चाहे वह व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल करना हो या विदेशी मंचों पर भारतीय प्रवासियों (Diaspora) को जोड़ना हो। आज की नीति 'गुटनिरपेक्षता' से हटकर 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) की ओर बढ़ चुकी है, जहाँ भारत अमेरिका, रूस और मध्य पूर्व के देशों के साथ एक साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है। ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में यह बदलाव सबसे अधिक स्पष्ट है। नेहरू के काल में ऑस्ट्रेलिया को पश्चिमी ब्लॉक का हिस्सा माना जाता था और संबंधों में एक प्रकार की दूरी थी। आज, हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की साझा चुनौतियों ने दोनों देशों को बेहद करीब ला दिया है। 'क्वाड' (QUAD) का गठन और 'इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट' (ECTA) जैसे समझौते इसी नई ऊर्जा का परिणाम हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय समुदाय अब केवल एक प्रवासी समूह नहीं, बल्कि भारत की 'सॉफ्ट पावर' का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है, जिसका उपयोग मोदी सरकार ने अपनी कूटनीतिक जीत के लिए बखूबी किया है। निष्कर्षतः, नेहरू और मोदी के युगों के बीच का अंतर केवल समय का नहीं, बल्कि कूटनीतिक प्राथमिकताओं का है। नेहरू ने भारत को एक नैतिक आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, जबकि मोदी भारत को एक 'विश्व बंधु' और 'प्रमुख वैश्विक शक्ति' (Leading Power) के रूप में पेश कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियों और व्यक्तित्व के इस संगम ने ही आधुनिक भारत की नई विदेश नीति को जन्म दिया है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
राजनीति

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में प्रशासन ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को अवैध बताते हुए ढहा दिया। दो नोटिस के बाद भी जवाब न मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

19 जुल॰ 2026, 01:34 am
नशे के खिलाफ जनआंदोलन की पुकार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुलिस और समाज को दी बड़ी जिम्मेदारी
राजनीति

नशे के खिलाफ जनआंदोलन की पुकार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुलिस और समाज को दी बड़ी जिम्मेदारी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मधुबन में नशे के विरुद्ध प्रदेशव्यापी अभियान का आगाज करते हुए इसे मानवता को बचाने की लड़ाई बताया।

19 जुल॰ 2026, 12:34 am
डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश
राजनीति

डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत पर रोक लगा दी है और उन्हें 19 जुलाई तक पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

19 जुल॰ 2026, 12:34 am