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इमिग्रेशन में कटौती से व्यवसायों पर पड़ने वाले असर की मुझे परवाह नहीं — पॉलीन हैनसन का कड़ा रुख

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 03:38 pm
इमिग्रेशन में कटौती से व्यवसायों पर पड़ने वाले असर की मुझे परवाह नहीं — पॉलीन हैनसन का कड़ा रुख

वन नेशन की नेता पॉलीन हैनसन ने प्रवासन में भारी कटौती की वकालत करते हुए कहा है कि उन्हें व्यवसायों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव की कोई चिंता नहीं है।

वन नेशन पार्टी की नेता और सीनेटर पॉलीन हैनसन ने ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक बार फिर प्रवासन (Migration) के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाया है। हैनसन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि स्थायी प्रवासन में भारी कटौती करने से ऑस्ट्रेलियाई व्यवसायों को श्रम की कमी या आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है। हैनसन ने वर्तमान आव्रजन प्रणाली को एक 'स्कैम' या घोटाला करार दिया, जिसने देश के बुनियादी ढांचे और आवास बाजार पर भारी दबाव डाला है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हैनसन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अल्बनीज सरकार प्रवासन के आंकड़ों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है। हैनसन का तर्क है कि दशकों से चली आ रही 'बिग ऑस्ट्रेलिया' की नीति ने आम नागरिकों के लिए घर खरीदना या किराए पर लेना असंभव बना दिया है। उन्होंने व्यवसायों की इस दलील को खारिज कर दिया कि उन्हें विकास के लिए विदेशी कामगारों की आवश्यकता है। हैनसन के अनुसार, व्यवसायों को प्रवासियों के भरोसे रहने के बजाय स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने और वेतन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषक इसे 'पॉलीन हैनसन प्रभाव' (Hanson Effect) के रूप में देख रहे हैं, जहाँ मुख्यधारा की पार्टियाँ, विशेष रूप से लेबर पार्टी, रूढ़िवादी मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी आव्रजन नीतियों को सख्त करने पर मजबूर हो रही हैं। हाल के महीनों में, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने छात्र वीजा (Student Visa) के नियमों में बदलाव किए हैं और स्थायी निवास के रास्तों को अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसका सीधा असर भारतीय समुदाय पर पड़ रहा है, जो ऑस्ट्रेलिया में दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समूह है और यहाँ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया के हॉस्पिटैलिटी, आईटी, स्वास्थ्य सेवा और बुजुर्गों की देखभाल (Aged Care) जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों और छात्रों की भारी मांग रहती है। हैनसन के बयानों और उसके परिणामस्वरूप सरकार द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदमों से न केवल नए आने वाले प्रवासियों के लिए रास्ते कठिन हो सकते हैं, बल्कि यहां पहले से मौजूद छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय चलाने वाले भारतीय मूल के लोगों को भी कार्यबल (Workforce) की कमी का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष और कई आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना सोचे-समझे की गई कटौती से ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है। हालांकि, हैनसन अपनी मांग पर अड़ी हैं कि जब तक आवास संकट और जीवन यापन की लागत (Cost of Living) कम नहीं होती, तब तक प्रवासन पर पूर्ण विराम या बड़ी कटौती आवश्यक है। आने वाले संघीय चुनावों में प्रवासन का मुद्दा एक प्रमुख निर्णायक कारक बनने की उम्मीद है, जिससे भारतीय समुदाय के भविष्य के वीज़ा और नागरिकता के अवसरों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
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