शिक्षा
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थना अनिवार्य; कांग्रेस ने लगाया 'आरएसएस एजेंडा' थोपने का आरोप
ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 09:01 pm

छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों की सुबह की सभा में सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र को अनिवार्य कर दिया है, जिस पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का उच्चारण अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आदेश ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जहां विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे शिक्षा के भगवाकरण की कोशिश बताया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इस नए प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। सुबह की सभा की शुरुआत दीप प्रज्वलन और 'दीप ज्योति नमोस्तुते' मंत्र के साथ होगी, जिसके बाद देवी सरस्वती की स्तुति और शिक्षकों के सम्मान में गुरु मंत्र का पाठ किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे छात्रों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का विकास होगा।
विपक्ष के नेता और कांग्रेस पार्टी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे को जबरन स्कूली शिक्षा पर थोप रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सरकारी संस्थानों में किसी विशिष्ट धर्म की प्रार्थनाओं को अनिवार्य करना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी शिक्षा सुविधाओं में सुधार करने के बजाय धार्मिक ध्रुवीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
दूसरी ओर, राज्य के शिक्षा मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र भारतीय ज्ञान परंपरा का हिस्सा हैं और इन्हें किसी धर्म विशेष से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु-शिष्य परंपरा और विद्या की देवी की आराधना भारत की साझा विरासत है, जो छात्रों को अनुशासन और एकाग्रता सिखाती है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रवासी समुदाय अक्सर भारत में शिक्षा और सांस्कृतिक नीतियों में हो रहे बदलावों पर गहरी नजर रखता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले छत्तीसगढ़ी प्रवासियों के बीच इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव मान रहे हैं, जबकि अन्य शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को लेकर चिंतित हैं। भारत में शिक्षा नीतियों का यह बदलाव अक्सर विदेशों में भारतीय डायस्पोरा के बीच भी चर्चा का विषय बनता है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो अपने बच्चों को भारतीय मूल्यों से जोड़े रखना चाहते हैं।
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