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मुझे तो यह भी नहीं पता एलआईसी का दफ्तर कहां है: राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन ने निवेश विवाद पर तोड़ी चुप्पी

ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 11:00 pm
मुझे तो यह भी नहीं पता एलआईसी का दफ्तर कहां है: राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन ने निवेश विवाद पर तोड़ी चुप्पी

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने एलआईसी के निवेश निर्णयों से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि कंपनी का ध्यान केवल खुदरा शेयरधारकों के लाभ पर है।

बेंगलुरु स्थित दिग्गज आभूषण निर्माता कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा उनकी कंपनी में किए गए निवेश को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। मेहता ने स्पष्ट किया है कि कंपनी का प्रबंधन एलआईसी के निवेश निर्णयों में किसी भी तरह से शामिल नहीं है और उनका पूरा ध्यान केवल कंपनी की व्यावसायिक वृद्धि और खुदरा शेयरधारकों के हितों की रक्षा करना है। हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान जब उनसे सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा दिग्गज एलआईसी द्वारा शेयरों की खरीद के बारे में पूछा गया, तो मेहता ने एक अनौपचारिक लहजे में कहा, "मुझे तो यह भी नहीं पता कि एलआईसी का दफ्तर कहां स्थित है।" उन्होंने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि एलआईसी एक स्वतंत्र संस्था है और वह अपने स्वयं के शोध और बाजार विश्लेषण के आधार पर निवेश के फैसले लेती है। मेहता के अनुसार, किसी भी बड़े संस्थान का निवेश करना उनके व्यवसाय की ताकत का प्रमाण है, न कि किसी मिलीभगत का परिणाम। राजेश एक्सपोर्ट्स, जो दुनिया की सबसे बड़ी सोने की रिफाइनरी संचालित करने का दावा करती है, पिछले कुछ समय से कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय खुलासों को लेकर बाजार विश्लेषकों की निगरानी में रही है। चेयरमैन ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी के परिचालन और लाभप्रदता में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंततः खुदरा शेयरधारकों को ही कंपनी की प्रगति से लाभ होगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भारतीय शेयर बाजार में सक्रिय रूप से निवेश करते हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी बड़ी कैप वाली कंपनियां अक्सर प्रवासियों के पोर्टफोलियो का हिस्सा होती हैं। जब भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी किसी निजी फर्म में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती या घटाती है, तो इसका सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ता है। मेहता ने यह भी संकेत दिया कि कंपनी आने वाले समय में अपने खुदरा विस्तार और वैश्विक निर्यात रणनीति पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि प्रबंधन का लक्ष्य पारदर्शिता बनाए रखना और दीर्घकालिक मूल्य सृजन करना है। आलोचकों का मानना है कि एलआईसी का निवेश अक्सर विवादों में रहता है, लेकिन मेहता के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी इसे केवल एक नियमित बाजार प्रक्रिया के रूप में देखती है। अंत में, राजेश मेहता ने दोहराया कि वह किसी भी संस्थान के साथ 'विशेष संबंधों' के दावों को खारिज करते हैं। उनके अनुसार, कंपनी के दरवाजे सभी निवेशकों के लिए खुले हैं और वे केवल अपनी बैलेंस शीट और प्रदर्शन के प्रति जवाबदेह हैं। आने वाले हफ्तों में बाजार यह देखेगा कि इस स्पष्टीकरण के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में निवेशकों का भरोसा कितना मजबूत होता है।
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