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IIT मद्रास ने अपने ग्लोबल ऑनलाइन प्रोग्राम के 1,460 स्नातकों को डिग्रियां प्रदान कीं

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:41 pm
IIT मद्रास ने अपने ग्लोबल ऑनलाइन प्रोग्राम के 1,460 स्नातकों को डिग्रियां प्रदान कीं

IIT मद्रास ने अपने प्रतिष्ठित ऑनलाइन बीएस डेटा साइंस प्रोग्राम के तहत 1,460 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की हैं, जो वैश्विक शिक्षा में एक बड़ा कदम है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने 'बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशन' प्रोग्राम के 1,460 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की हैं। यह कार्यक्रम संस्थान की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत दुनिया भर के छात्रों को भौतिक रूप से कैंपस में उपस्थित हुए बिना आईआईटी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में आयोजित एक दीक्षांत समारोह के दौरान, संस्थान ने उन स्नातकों की सफलता का जश्न मनाया, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कार्यक्रम अपनी तरह का पहला ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम है, जिसने पारंपरिक प्रवेश परीक्षाओं (जैसे JEE) की बाधाओं को हटाकर केवल योग्यता और कड़ी मेहनत के आधार पर प्रवेश सुनिश्चित किया है। स्नातक होने वाले छात्रों में देश-विदेश के विभिन्न आयु समूहों और पेशेवर पृष्ठभूमियों के लोग शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया में डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मांग बढ़ रही है, ऐसे में आईआईटी मद्रास की यह डिग्री प्रवासी भारतीयों और वहां रह रहे छात्रों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। यह प्रोग्राम उन कामकाजी पेशेवरों के लिए एक उत्कृष्ट अवसर है जो अपनी वर्तमान नौकरियों को छोड़े बिना वैश्विक स्तर की साख हासिल करना चाहते हैं। संस्थान के अनुसार, इस बैच के कई स्नातकों ने पहले ही प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनियों में स्थान प्राप्त कर लिया है या उच्च शिक्षा के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि ऑनलाइन माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पारंपरिक शिक्षा के बराबर ही प्रभावी है। कार्यक्रम की संरचना ऐसी है कि यह छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग की वर्तमान जरूरतों के हिसाब से तैयार करती है। आईआईटी मद्रास के निदेशकों ने इस अवसर पर कहा कि यह कार्यक्रम न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा के भविष्य को परिभाषित कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय छात्र भी इस 'हाइब्रिड' मॉडल का लाभ उठाकर अपनी विशेषज्ञता बढ़ा सकते हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलती है। शिक्षा का यह मॉडल आने वाले समय में डिजिटल इंडिया और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग की एक नई मिसाल पेश करेगा।
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