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यूएई में भारतीय पासपोर्ट और वीजा सेवाओं के लिए नया सर्विस प्रोवाइडर, 1 जुलाई से बदलेंगे नियम
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 05:01 pm
संयुक्त अरब अमीरात में 1 जुलाई 2026 से भारतीय पासपोर्ट और वीजा सेवाओं का प्रबंधन अल हिंद टूर्स एंड ट्रैवल्स संभालेगा। आवेदकों को वर्तमान केंद्रों का उपयोग जारी रखने की सलाह दी गई है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की घोषणा की गई है। भारत सरकार ने यूएई में भारतीय पासपोर्ट, वीजा और अन्य कांसुलर सेवाओं के लिए एक नए सेवा प्रदाता (सर्विस प्रोवाइडर) की नियुक्ति का निर्णय लिया है। 1 जुलाई, 2026 से, 'अल हिंद टूर्स एंड ट्रैवल्स एलएलसी' (Al Hind Tours and Travels LLC) इन सेवाओं का प्रबंधन संभालेगा।
यह नया अनुबंध वर्तमान सेवा प्रदाताओं, बीएलएस इंटरनेशनल सर्विसेज लिमिटेड (BLS International Services Ltd.) और एसजीआईवीएस ग्लोबल (SGIVS Global) की जगह लेगा। इस बदलाव का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना और आवेदकों को अधिक सुव्यवस्थित अनुभव प्रदान करना है। यूएई में भारतीय दूतावास और महावाणिज्य दूतावास ने स्पष्ट किया है कि यह परिवर्तन आधिकारिक तौर पर जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।
आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए अधिकारियों ने कहा है कि 30 जून, 2026 तक वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहेगी। जो लोग पासपोर्ट नवीनीकरण, वीजा आवेदन या अटेस्टेशन सेवाओं की योजना बना रहे हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे तब तक मौजूदा बीएलएस केंद्रों का ही उपयोग करें। नए सेवा केंद्रों के पते, संपर्क विवरण और अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी आने वाले महीनों में आधिकारिक तौर पर साझा की जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है। वैश्विक स्तर पर भारत सरकार अपने आउटसोर्सिंग मॉडल की समीक्षा कर रही है ताकि प्रवासी भारतीयों (NRIs) को बेहतर सेवाएं मिल सकें। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में 'वीएफएस ग्लोबल' (VFS Global) भारतीय दूतावास के लिए मुख्य सेवा प्रदाता है, उसी तरह यूएई में इस बदलाव का उद्देश्य तकनीकी एकीकरण और पारदर्शिता को बढ़ाना है। ऑस्ट्रेलिया और यूएई दोनों ही देशों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर और छात्र रहते हैं, जिनके लिए सुचारू कांसुलर सेवाएं अनिवार्य हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए अनुबंध के तहत सेवाओं के डिजिटलीकरण पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे प्रतीक्षा समय (waiting time) में कमी आने और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है। भारतीय विदेश मंत्रालय समय-समय पर दुनिया भर के मिशनों में ऐसी निविदाएं (tenders) आमंत्रित करता है ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाए रखा जा सके।
प्रवासियों को आगाह किया गया है कि वे इस बदलाव के दौरान केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अनाधिकृत एजेंट के झांसे में न आएं। नए सेवा केंद्रों के संचालन शुरू होने तक मौजूदा शुल्क और प्रक्रियाओं में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
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