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भारत सरकार ने GIC Re में 5% हिस्सेदारी बेचकर ₹3,400 करोड़ से अधिक जुटाए

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:08 pm
भारत सरकार ने GIC Re में 5% हिस्सेदारी बेचकर ₹3,400 करोड़ से अधिक जुटाए

भारत सरकार ने जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) में अपनी 5% हिस्सेदारी की सफल बिक्री पूरी कर ली है, जिससे सरकारी खजाने में 3,400 करोड़ रुपये से अधिक आए हैं।

भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख पुनर्बीमा कंपनी, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) में अपनी 5% हिस्सेदारी की बिक्री सफलतापूर्वक संपन्न कर ली है। इस बिक्री प्रक्रिया के माध्यम से सरकार ने लगभग 3,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है। यह कदम केंद्र सरकार के चालू वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। बिक्री की प्रक्रिया 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के माध्यम से आयोजित की गई थी, जो दो दिनों तक चली। पहले दिन यह प्रस्ताव केवल संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) के लिए खुला था, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशकों (Retail Investors) को बोली लगाने का अवसर दिया गया। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुष्टि की कि इस विनिवेश को बाजार से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। संस्थागत और खुदरा, दोनों ही श्रेणियों में इस निर्गम को भरपूर समर्थन मिला और यह ओवरसब्सक्राइब हुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार ने इस बिक्री के लिए 395 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस (न्यूनतम मूल्य) तय किया था। हालांकि, निवेशकों की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने अपने 'ग्रीन-शू विकल्प' का उपयोग करने का निर्णय लिया। शुरुआत में सरकार ने केवल 3.39% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन अधिक मांग के कारण इसे बढ़ाकर कुल 5% कर दिया गया। इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद, GIC Re में भारत सरकार की प्रमोटर हिस्सेदारी घटकर लगभग 80.78% रह गई है। जीआईसी री (GIC Re) भारत की एकमात्र घरेलू पुनर्बीमा कंपनी है और इसका भारतीय बीमा बाजार में एकाधिकार जैसी स्थिति है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के निवेशकों के लिए, जो भारतीय शेयर बाजार में रुचि रखते हैं, यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में निवेश को अक्सर स्थिर लाभांश और दीर्घकालिक सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है। सिडनी और मेलबर्न स्थित वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि भारत के सुधरते व्यापक आर्थिक संकेतकों और विनिवेश की गति के कारण प्रवासी भारतीय (NRIs) अब भारतीय इक्विटी बाजार की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। यह विनिवेश न केवल सरकारी घाटे को कम करने में मदद करेगा, बल्कि यह शेयर बाजार में GIC Re की तरलता (liquidity) को भी बढ़ाएगा। सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी कम से कम 25% होनी चाहिए, और यह बिक्री सरकार को उस दिशा में कदम बढ़ाने में मदद करती है। आने वाले समय में, सरकार कुछ अन्य बड़ी सरकारी कंपनियों में भी इसी तरह की हिस्सेदारी बेच सकती है, जिससे भारतीय बाजार में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
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