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टेक्सास में भारतीय एच-1बी कर्मचारी ने भारतीय मूल के बॉस पर किया मुकदमा, लगाया $100k ऐंठने और निर्वासन की धमकी देने का आरोप

ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 02:02 am
टेक्सास में भारतीय एच-1बी कर्मचारी ने भारतीय मूल के बॉस पर किया मुकदमा, लगाया $100k ऐंठने और निर्वासन की धमकी देने का आरोप

एक भारतीय आईटी पेशेवर ने टेक्सास स्थित कंपनी और उसके भारतीय मूल के मालिक पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है, जिसमें अवैध रूप से पैसे वसूलने और उत्पीड़न की बात कही गई है।

अमेरिका के टेक्सास राज्य से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक भारतीय एच-1बी (H-1B) वीजा धारक कर्मचारी ने अपनी ही कंपनी के भारतीय मूल के मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कर्मचारी का आरोप है कि उसे नौकरी के पहले ही दिन से काम नहीं दिया गया और वीजा स्टेटस बनाए रखने के नाम पर उससे लगभग 100,000 डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) की अवैध वसूली की गई। अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, पीड़ित कर्मचारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उसे 'बेंच' (बिना काम के) पर रखा गया और जब उसने इसका विरोध किया, तो उसे अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) द्वारा निर्वासन की धमकी दी गई। यह मामला अमेरिका में चल रहे 'वीजा फ्रॉड' और 'ग्रे मार्केट' कंसल्टेंसी के काले सच को उजागर करता है, जहाँ नियोक्ता अक्सर विदेशी कामगारों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के सीईओ, जो स्वयं भारतीय मूल के हैं, ने कर्मचारी को मजबूर किया कि वह अपनी सेलरी का एक बड़ा हिस्सा वापस कंपनी को दे ताकि कागजों पर उसकी नौकरी बरकरार दिखे। कर्मचारी का दावा है कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और यह डराया गया कि यदि उसने पैसे देने से इनकार किया, तो उसका वीजा रद्द करवा दिया जाएगा, जिससे उसे तुरंत भारत लौटना पड़ेगा। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी की तरह है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की वीजा प्रणाली (जैसे सबक्लास 482 या 186) अमेरिका के एच-1बी से भिन्न है, लेकिन 'नियोक्ता प्रायोजन' (Employer Sponsorship) में होने वाले शोषण के मामले यहाँ भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। ऑस्ट्रेलियाई फेयर वर्क ओम्बड्समैन (FWO) ने भी कई बार प्रवासी कामगारों को ऐसे नियोक्ताओं से सावधान रहने की सलाह दी है जो वीजा के बदले पैसे की मांग करते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला 'वर्कप्लेस कोएर्शन' और मानव तस्करी की श्रेणी में आ सकता है। अमेरिका में एच-1बी वीजा नियमों के तहत, नियोक्ता के लिए यह अनिवार्य है कि वह कर्मचारी को उस वेतन का भुगतान करे जिसका वादा लेबर कंडीशन एप्लिकेशन (LCA) में किया गया था, भले ही कर्मचारी के पास उस समय कोई प्रोजेक्ट न हो। इस मामले ने एक बार फिर आईटी कंसल्टेंसी फर्मों के कामकाज के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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