इमिकास्ट
वीजा अनिश्चितता और नौकरी के संकट के बीच भारतीय छात्रों ने तेज की एजुकेशन लोन की अदायगी
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 05:31 pm

अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्र वीजा नियमों में बदलाव और मंदी की आशंका के चलते अपना एजुकेशन लोन जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्रों के बीच एक नया रुझान देखने को मिल रहा है। नौकरी की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं और वीजा नीतियों में संभावित बदलावों के डर से, ये छात्र अपने शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) को निर्धारित समय से पहले ही चुकाने की कोशिश कर रहे हैं। बैंकिंग सूत्रों और ऋण सलाहकारों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में एकमुश्त भुगतान (लम्प-सम पेमेंट) और मासिक किस्तों में स्वैच्छिक वृद्धि के मामलों में तेजी आई है।
आंकड़े बताते हैं कि पहले छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रेस पीरियड का लाभ उठाते थे और न्यूनतम किस्त के साथ भुगतान करते थे। हालांकि, अब परिदृश्य बदल गया है। अमेरिका में 'एच-1बी' वीजा और 'ओपीटी' (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) नियमों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, टेक सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी ने छात्रों के मन में असुरक्षा पैदा कर दी है। ऐसे में छात्र कर्ज के बोझ को कम करना चाहते हैं ताकि यदि उन्हें भारत वापस लौटना पड़े, तो उनके सिर पर भारी वित्तीय देनदारी न रहे।
यह स्थिति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय समुदाय के बीच इसी तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हाल ही में अपने आव्रजन नियमों को कड़ा किया है और छात्र वीजा पर नई पाबंदियां लगाई हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय छात्र भी अब अधिक सतर्क हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय छात्रों का कहना है कि वे अपनी जीवनशैली के खर्चों में कटौती कर रहे हैं ताकि बचा हुआ पैसा कर्ज चुकाने में लगाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय छात्र भी अमेरिकी छात्रों की तरह ही 'एग्जिट स्ट्रैटेजी' पर काम कर रहे हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत भी एक बड़ा कारक है। विदेशी मुद्रा में कमाई करने वाले छात्र वर्तमान विनिमय दर का लाभ उठाकर अपने भारतीय बैंकों के लोन को तेजी से खत्म करना चाहते हैं। अगर आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक मंदी गहराती है या आव्रजन नियम और सख्त होते हैं, तो कम कर्ज वाला छात्र मानसिक और आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करेगा।
अंततः, भारतीय छात्रों का यह कदम उनकी व्यावहारिक सोच को दर्शाता है। वे अब केवल डिग्री हासिल करने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और बदलती अर्थव्यवस्था को देखते हुए अपनी वित्तीय स्थिति को पहले से ही मजबूत कर लेना चाहते हैं। यह रुझान आने वाले वर्षों में विदेशी शिक्षा के लिए लिए जाने वाले ऋणों के प्रबंधन के तरीके को बदल सकता है।
संबंधित ख़बरें

इमिग्रेशन
मार्को रुबियो का ज्ञापन: ट्रंप सहयोगी के आलोचक अप्रवासी बेटो कोरल की गिरफ्तारी का समर्थन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस
अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने कोलंबियाई कार्यकर्ता बेटो कोरल की गिरफ्तारी का समर्थन किया है, जिससे राजनीतिक शरण और प्रवासियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
21 जून 2026, 03:57 am
-1781968449533.webp)
इमिग्रेशन
जुलाई 2026 यूएस वीजा बुलेटिन: भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदकों को बड़ा झटका, EB-2 और EB-5 श्रेणियां हुई 'अनअवेलेबल'
अमेरिकी विदेश विभाग के जुलाई 2026 वीजा बुलेटिन ने भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा अवधि बढ़ा दी है। EB-2 और EB-5 श्रेणियां अब इस वित्त वर्ष के लिए उपलब्ध नहीं हैं।
21 जून 2026, 03:41 am

इमिग्रेशन
लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल का बड़ा फैसला: गैर-नागरिकों को स्थानीय चुनावों में मिल सकता है वोट देने का अधिकार
लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल ने नवंबर के मतपत्र पर एक उपाय रखने की मंजूरी दी है, जो गैर-नागरिकों को स्थानीय चुनावों में मतदान करने की अनुमति देगा।
21 जून 2026, 03:27 am
