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तनाव के साये में ईरान की फुटबॉल टीम पहुंची अमेरिका, शांति समझौते के बावजूद खिलाड़ियों ने जताई चिंता

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 02:31 pm
तनाव के साये में ईरान की फुटबॉल टीम पहुंची अमेरिका, शांति समझौते के बावजूद खिलाड़ियों ने जताई चिंता

ईरानी फुटबॉल टीम विश्व कप के लिए अमेरिका पहुंच चुकी है, लेकिन खिलाड़ियों का कहना है कि वीजा विवाद और राजनीतिक तनाव ने खेल के आनंद को कम कर दिया है।

ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम लॉस एंजिल्स पहुंच गई है, लेकिन टीम के खिलाड़ियों का कहना है कि चल रहे राजनीतिक विवादों और प्रशासनिक बाधाओं ने विश्व कप के उत्साह को फीका कर दिया है। यह दौरा एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हो रहा है, जहां टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार एक मेजबान देश उस देश की टीम का स्वागत कर रहा है जिसके साथ उसके कूटनीतिक संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। टीम के स्टार स्ट्राइकर मेहदी तरेमी ने स्वीकार किया कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले की उथल-पुथल फीफा के शांति के संदेश को प्रभावित कर रही है। ईरानी टीम को अमेरिका पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। वीजा संबंधी विवादों के कारण टीम को पहले मेक्सिको के तिजुआना में रुकना पड़ा, जहां से रविवार को वे लॉस एंजिल्स के लिए रवाना हुए। इस बीच, दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते की घोषणा की गई है, लेकिन इसके बावजूद माहौल में भारी तनाव महसूस किया जा रहा है। टीम के कोच अमीर घलेनोई ने उम्मीद जताई है कि इन बाहरी बाधाओं का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नहीं पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और ईरानी समुदायों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय खेल को राजनीति से ऊपर देखने की वकालत करते रहे हैं। हालांकि, ईरानी टीम को न केवल अमेरिकी अधिकारियों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें अपने ही देश के कुछ नागरिकों के विरोध का भी डर है। कई प्रवासियों का मानना है कि वर्तमान टीम देश की जनता की भावनाओं का पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं करती है। तैयारियों के दौरान ईरान को कई झटकों का सामना करना पड़ा है, जिसमें कई खेल अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। तरेमी ने कहा कि मैच शुरू होने से पहले ही खिलाड़ियों ने उस दबाव और तनाव को महसूस किया जो खेल भावना के विपरीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खिलाड़ियों का ध्यान केवल फुटबॉल पर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। जैसे-जैसे विश्व कप का रोमांच बढ़ रहा है, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि खेल के मैदान पर यह 'शांति समझौता' कितना कारगर साबित होता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई खेल प्रेमी भी इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह न केवल खेल का बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भी एक बड़ा परीक्षण है।
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