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ईरान-यूएस तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी
ICN24 Newsroom 17 जुल॰ 2026, 03:32 am

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहाजरानी महानिदेशालय ने भारतीय नाविकों को होर्मुज रूट पर तैनाती से बचने के निर्देश दिए हैं।
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, भारत सरकार के जहाजरानी महानिदेशालय (DGS) ने एक आधिकारिक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इस निर्देश में भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और आसपास के उच्च-जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में तैनाती से बचने या अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
जहाजरानी महानिदेशालय द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्र में अस्थिरता के कारण वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ गई है। डीजीएस ने सभी आरपीएसएल (भर्ती और प्लेसमेंट सेवा) एजेंटों और जहाजों के मालिकों को निर्देश दिया है कि वे समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करें। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों और जहाजों को कब्जे में लेने की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं, जिससे भारतीय क्रू की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार बेहद सतर्क है।
भारतीय नाविक वैश्विक मर्चेंट नेवी का एक बड़ा हिस्सा हैं, जो दुनिया भर के जहाजों पर लगभग 10 से 12 प्रतिशत कार्यबल का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां बसे कई परिवारों के सदस्य अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी क्षेत्र में कार्यरत हैं। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है, और यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
एडवाइजरी में यह भी सुझाव दिया गया है कि कंपनियां अपने नाविकों को संभावित खतरों के बारे में पूरी जानकारी दें और यदि संभव हो तो वैकल्पिक मार्गों का चयन करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावासों और नौसेना के साथ संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। हिंद महासागर और खाड़ी देशों के बीच व्यापारिक मार्गों पर भारतीय नौसेना पहले से ही गश्त बढ़ा चुकी है ताकि भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों ने ओमान की खाड़ी और लाल सागर तक सुरक्षा जोखिम पैदा कर दिया है। भारतीय नाविकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जॉइनिंग से पहले जहाज के रूट और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूर करें। यह कदम न केवल नाविकों की जान बचाने के लिए है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी है कि भारतीय श्रम शक्ति को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच अनावश्यक जोखिम का सामना न करना पड़े।
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