राजनीति
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अमेरिका को सख्त चेतावनी, 'ट्रंप के दस्तखत की कोई कीमत नहीं'
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 10:34 am

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को 'महा शैतान' बताते हुए कड़ा सबक सिखाने की चेतावनी दी है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर अविश्वास जताया है।
तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में एक कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को 'महा शैतान' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान अपने हितों के खिलाफ काम करने वाली ताकतों को कभी न भूलने वाला सबक सिखाएगा। खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और परमाणु समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
अपने संबोधन के दौरान खामेनेई ने विशेष रूप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के किसी भी दस्तखत या वादे की ईरान की नजर में कोई कीमत नहीं है। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से एकतरफा हटने का फैसला किया था, जिसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए थे। खामेनेई ने इसी विश्वासघात का जिक्र करते हुए भविष्य में किसी भी बातचीत के लिए अमेरिका की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सर्वोच्च नेता ने ईरानी नागरिकों से एकजुट रहने और देश के संस्थानों का पुरजोर समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश के हितों की रक्षा के लिए जनता और प्रशासन को सतर्क रहना होगा। खामेनेई ने तर्क दिया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की संप्रभुता को कमजोर करना है, लेकिन ईरानी आवाम अपनी एकजुटता से इन प्रयासों को विफल कर देगी। इस बयान को घरेलू स्तर पर राष्ट्रवाद की भावना जगाने और बाहरी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए इस घटनाक्रम के व्यापक निहितार्थ हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में व्यापारिक और पारिवारिक संबंध रखता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव सीधे तौर पर वैश्विक तेल की कीमतों को प्रभावित करता है, जिसका असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन के दामों और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता वहां रह रहे लाखों भारतीय कामगारों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनती है, जो ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उनके रिश्तेदारों के लिए भी तनाव का कारण है।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई का यह कड़ा रुख न केवल अमेरिका को एक संदेश है, बल्कि यह आगामी अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में ईरान की सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करने की एक रणनीति भी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों के लिए, जो मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के पक्षधर हैं, यह तनावपूर्ण स्थिति कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की एक नई चुनौती पेश करती है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाशिंगटन इस तीखी बयानबाजी पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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