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कौशांबी: CRPF जवान के भूमि कब्जे का दावा जांच में खारिज, SDM ने कहा- मामला न्यायालय में विचाराधीन
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 08:32 pm
कौशांबी के एसडीएम ने सीआरपीएफ जवान के उन दावों को खारिज कर दिया है जिसमें उसने अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया था। जांच में मामला कोर्ट में लंबित पाया गया है।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है, जहां जिला प्रशासन ने एक सीआरपीएफ (CRPF) जवान द्वारा अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जे के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उपजिलाधिकारी (SDM) आकाश सिंह द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि जवान द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और विवादित भूमि का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब कौशांबी थाना क्षेत्र के विजया चौराहे के पास तैनात सीआरपीएफ जवान शिवाकांत ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में जवान ने आरोप लगाया था कि उनकी अर्ध-निर्मित संपत्ति पर कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने अवैध रूप से ताला लगा दिया है। जवान का दावा था कि उनके परिवार ने स्थानीय पुलिस से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला गंभीर होते देख, जवान के परिजनों ने 14 जुलाई को जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) से औपचारिक शिकायत की थी।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और सुरक्षा बल के जवान से जुड़े होने के कारण प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। सिराथू के एसडीएम आकाश सिंह ने राजस्व टीम के साथ मौके का मुआयना किया और सरकारी अभिलेखों की पड़ताल की। जांच के बाद एसडीएम ने स्पष्ट किया कि मौके पर किसी भी नए कब्जे या कब्जे के प्रयास के प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रशासन के अनुसार, यह पूरी तरह से दो पक्षों के बीच का पुराना भूमि विवाद है।
जांच के दौरान दूसरे पक्ष, शमशाद ने अपने भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए। शमशाद का तर्क है कि सीआरपीएफ जवान की मां गोमती देवी के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में केवल पौना बिस्सा जमीन दर्ज है, जबकि विवादित हिस्सा उनकी निजी संपत्ति है। शमशाद ने आरोप लगाया कि जवान और उनके भाई अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर उनकी खाली पड़ी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस जमीन पर पहले से ही न्यायालय का स्थगन आदेश (Stay Order) प्रभावी है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब मामला न्यायालय में लंबित हो, तो किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने या भ्रामक सूचना फैलाने का अधिकार नहीं है। यह घटना उन प्रवासी भारतीयों और सुरक्षा कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है जो अक्सर अपने पैतृक स्थानों पर भूमि विवादों का सामना करते हैं। एसडीएम ने आम जनता से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए भ्रामक संदेश साझा न करें, क्योंकि इससे सांप्रदायिक सौहार्द या कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आईसीएन24 (ICN24) के पाठकों के लिए यह जानना आवश्यक है कि भारत में संपत्ति विवादों के समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इस मामले में भी, प्रशासनिक जांच ने यह सिद्ध किया है कि वायरल दावों के पीछे कानूनी पेचीदगियां थीं जिन्हें सोशल मीडिया पर पूरी तरह से नहीं दर्शाया गया था। फिलहाल, प्रशासन ने दोनों पक्षों को न्यायालय के अंतिम फैसले तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
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