राजनीति
कुरुक्षेत्र: परिवार पहचान पत्र की खामियों से जनता बेहाल, पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे बुजुर्ग
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 12:35 pm

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में परिवार पहचान पत्र (PPP) में तकनीकी खामियों और गलत डेटा के कारण हजारों लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। बुजुर्गों को अपनी रुकी हुई पेंशन के लिए कड़कड़ाती धूप और सरकारी दफ्तरों की कतारों में संघर्ष करना पड़ रहा है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में इन दिनों सरकारी दफ्तरों के बाहर बुजुर्गों और महिलाओं की लंबी कतारें एक आम दृश्य बन गई हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'परिवार पहचान पत्र' (पीपीपी) अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि कोई अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए भटक रहा है, तो कोई आईडी में दर्ज गलत आय को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुरुक्षेत्र के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) कार्यालय और विभिन्न नागरिक सुविधा केंद्रों पर हर दिन सैकड़ों लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक समस्या उन बुजुर्गों को हो रही है जिनकी बुढ़ापा पेंशन अचानक रोक दी गई है। जांच में पाया गया कि परिवार पहचान पत्र में उनकी पारिवारिक आय को गलती से सीमा से अधिक दर्शा दिया गया है, जिसके कारण वे तकनीकी रूप से पेंशन के लिए 'अपात्र' हो गए हैं।
जमीनी स्तर पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। कई बुजुर्गों का कहना है कि वे महीनों से समाज कल्याण विभाग और सीएससी केंद्रों के बीच चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। कुछ मामलों में तो मृत व्यक्तियों के नाम आईडी में सक्रिय हैं, जबकि जीवित व्यक्तियों को कागजों पर 'मृत' घोषित कर दिया गया है। इन तकनीकी त्रुटियों ने न केवल पेंशन बल्कि राशन कार्ड और अन्य सरकारी सब्सिडी को भी प्रभावित किया है।
यह मुद्दा केवल स्थानीय निवासियों तक ही सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के वे लोग, जिनके माता-पिता हरियाणा में अकेले रहते हैं, इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीयों (NRIs) का कहना है कि डिजिटल सिस्टम को पारदर्शी बनाने की कोशिश में मानवीय संवेदनाओं और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके बुजुर्ग माता-पिता के लिए इन जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को समझना और दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ना शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाला है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के डेटा को डिजिटल कर दिया, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया में भारी चूक हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि त्रुटियों को ठीक करने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन आवेदनों की भारी संख्या और सर्वर की धीमी गति के कारण काम की रफ्तार सुस्त है। जब तक ये तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं, तब तक कुरुक्षेत्र की जनता को अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए यूं ही संघर्ष करना पड़ेगा।
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