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वांगचुक के बिना भी संसद मार्च जारी रहेगा: पत्नी गीतांजलि आंग्मो का बड़ा ऐलान

ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 11:35 am
वांगचुक के बिना भी संसद मार्च जारी रहेगा: पत्नी गीतांजलि आंग्मो का बड़ा ऐलान

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार के बाद, गीतांजलि आंग्मो ने घोषणा की है कि लद्दाख की मांगों को लेकर सोमवार का संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार होगा।

लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने स्पष्ट कर दिया है कि सोमवार को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च हर हाल में निकाला जाएगा, चाहे वांगचुक उसमें व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सकें या नहीं। यह बयान दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उस याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार करने के कुछ ही घंटों बाद आया है, जिसमें केंद्र सरकार के वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सफदरजंग अस्पताल के बाहर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि लद्दाख से आए प्रदर्शनकारियों का मनोबल ऊंचा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लद्दाख के अस्तित्व और वहां की आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा का है। आंग्मो ने कहा कि भले ही प्रशासन ने वांगचुक को अस्पताल में रखा है, लेकिन हजारों की संख्या में लद्दाख के लोग और उनके समर्थक अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने प्रशासन के रुख को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने से रोका जा रहा है। यह विवाद तब और गहरा गया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल ले जाना आवश्यक था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह उनके लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है। वांगचुक और उनके करीब 150 समर्थकों ने लेह से दिल्ली तक की करीब 1,000 किलोमीटर की पदयात्रा की थी, ताकि केंद्र सरकार को उनकी चार मुख्य मांगों—लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, भर्ती प्रक्रिया में तेजी और लोकसभा की दो सीटों की मांग—की याद दिलाई जा सके। इस आंदोलन की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के कई सदस्यों ने सोशल मीडिया के माध्यम से लद्दाख के पर्यावरण और वहां के लोगों के अधिकारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। प्रवासी भारतीयों का मानना है कि लद्दाख का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) न केवल भारत बल्कि वैश्विक जलवायु स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। आगामी सोमवार का मार्च न केवल लद्दाख की मांगों के लिए एक परीक्षा है, बल्कि यह केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद के बंद दरवाजों को खोलने का एक प्रयास भी है। गीतांजलि आंग्मो ने अपील की है कि दिल्ली के नागरिक और अन्य राज्यों के लोग भी इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होकर लद्दाख के भविष्य को सुरक्षित करने में अपना योगदान दें। अब सभी की निगाहें सोमवार को दिल्ली की सड़कों पर होने वाले इस घटनाक्रम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह गतिरोध किस दिशा में मुड़ता है।
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