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लाठी, आंसू और बैरिकेड्स: जंतर-मंतर पर पुलिस ने रोका CJP का मार्च, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक

ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 04:36 am
लाठी, आंसू और बैरिकेड्स: जंतर-मंतर पर पुलिस ने रोका CJP का मार्च, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण मार्च के दौरान भारी हंगामा हुआ, जहाँ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोककर मंच हटा दिया।

देश की राजधानी दिल्ली का हृदय स्थल माना जाने वाला जंतर-मंतर एक बार फिर भारी हंगामे और पुलिसिया कार्रवाई का गवाह बना। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) द्वारा आयोजित एक मार्च, जो पुलिसकर्मियों को फूल भेंट करने के शांतिपूर्ण इरादे से शुरू हुआ था, शाम ढलते-ढलते तनावपूर्ण संघर्ष में बदल गया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की और अंततः मुख्य प्रदर्शन मंच को पूरी तरह से हटा दिया। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यह मार्च नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के आह्वान के साथ शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में फूल और तख्तियां लेकर चल रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने सुरक्षा घेरे को पार करने की कोशिश की, स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें लाठीचार्ज की खबरें भी सामने आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई के कारण वहां मौजूद कई प्रदर्शनकारी चोटिल हुए और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। दोपहर बाद तक, जंतर-मंतर पर बने मुख्य मंच को पुलिस ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई ने नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अपनी बात शांतिपूर्वक रखने के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा अधिकारियों का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ के अनियंत्रित होने के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य था। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की ये राजनीतिक हलचलें गहरी चिंता और रुचि का विषय रहती हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में नागरिक अधिकारों की स्थिति पर अपनी राय व्यक्त करते रहे हैं। इस घटना का प्रभाव केवल दिल्ली की सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन वैश्विक भारतीयों को भी प्रभावित करता है जो भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में फलते-फूलते देखना चाहते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर अक्सर प्रवासी मंचों पर बहस होती रही है, और जंतर-मंतर की यह घटना उसी विमर्श का हिस्सा बन गई है। वर्तमान में, जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात है और इलाके को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। नागरिक समाज के नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई को 'लोकतंत्र की आवाज दबाने' वाला कदम बताया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति गरमाने के आसार हैं, क्योंकि कई मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाने की घोषणा की है।
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