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H-1B वीजा पर बड़ा फैसला: अमेरिकी अदालत ने रोकी भारी फीस, भारतीय पेशेवरों को मिली बड़ी राहत

ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 04:31 pm
H-1B वीजा पर बड़ा फैसला: अमेरिकी अदालत ने रोकी भारी फीस, भारतीय पेशेवरों को मिली बड़ी राहत

अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने H-1B वीजा के लिए प्रस्तावित भारी भरकम फीस वृद्धि पर रोक लगा दी है, जिससे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

अमेरिका से भारतीय पेशेवरों और वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति प्रशासन द्वारा प्रस्तावित उस विवादास्पद नियम को रद्द कर दिया है, जिसके तहत H-1B वीजा आवेदन के लिए लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस वसूलने की योजना थी। इस अदालती फैसले ने न केवल भारतीय आईटी विशेषज्ञों की चिंताओं को दूर किया है, बल्कि उन कंपनियों को भी संजीवनी दी है जो वैश्विक प्रतिभाओं पर निर्भर हैं। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा लागू की गई यह फीस वृद्धि प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण थी और इससे कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फीस लागू हो जाती, तो छोटे और मध्यम स्तर के स्टार्टअप्स के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को नियुक्त करना लगभग असंभव हो जाता। विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों के लिए, जो H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं, यह फैसला करियर की सुरक्षा और वित्तीय बोझ को कम करने वाला साबित होगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह समाचार विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार और मित्र अमेरिका में कार्यरत हैं या वहां जाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, वैश्विक स्तर पर कुशल श्रम (Skilled Migration) की नीतियों में होने वाले इस तरह के बदलावों का असर ऑस्ट्रेलिया की अपनी आव्रजन नीतियों और तकनीकी बाजार की प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में स्थित टेक कंसल्टेंसी फर्मों, जिनके संचालन अमेरिका और भारत दोनों देशों में फैले हैं, ने इस निर्णय का स्वागत किया है। विस्तृत कानूनी समीक्षा के दौरान अदालत ने पाया कि इतनी अधिक राशि वसूलने का कोई ठोस आधार नहीं था। आलोचकों का तर्क था कि यह नीति जानबूझकर कुशल प्रवासियों के रास्ते में रोड़े अटकाने के लिए बनाई गई थी। भारतीय टेक जगत ने इस कदम को न्यायसंगत बताया है, क्योंकि भारत हर साल अमेरिका को सबसे अधिक संख्या में इंजीनियर और डेवलपर प्रदान करता है। भविष्य की ओर देखें तो यह फैसला आव्रजन कानूनों की स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि अमेरिकी सरकार इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका के दरवाजे पहले की तरह ही खुले नजर आ रहे हैं। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुशल प्रवासियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है और किसी भी देश के लिए उन पर अत्यधिक वित्तीय बोझ डालना विकास की राह में बाधा बन सकता है।
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