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ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: 'पार्टी का पुनर्गठन करूँगी और भाजपा का अंत देखूँगी', बागी नेताओं को दी कड़ी चेतावनी

ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 04:32 am
ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: 'पार्टी का पुनर्गठन करूँगी और भाजपा का अंत देखूँगी', बागी नेताओं को दी कड़ी चेतावनी

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बागियों को चुनौती देते हुए कहा है कि वह 2026 में पार्टी को फिर से खड़ा करेंगी और भाजपा का मुकाबला करेंगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक अत्यंत आक्रामक और दृढ़ रुख अपनाया है। कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर रहने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता ही उनकी असली 'स्वर्ण खदान' (goldmine) हैं और वह उनके दम पर एक बार फिर टीएमसी का पुनर्गठन करेंगी। ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में दलबदल और आंतरिक कलह की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। बनर्जी ने अपने राजनीतिक सफर के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1997 में शून्य से शुरुआत की थी और 2004 के कठिन दौर में भी अकेले संघर्ष किया था। उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा, "यदि मैंने 1997 और 2004 में अकेले दम पर पार्टी खड़ी की थी, तो मैं 2026 में भी इसे फिर से नया स्वरूप देने की शक्ति रखती हूँ।" भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए टीएमसी सुप्रीमो ने भविष्यवाणी की कि वह देश में भारतीय जनता पार्टी के पतन की गवाह बनेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बंगाल की जनता उन्हें करारा जवाब देगी। बनर्जी का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाली नहीं हैं और आने वाले चुनावों में वह एक नई रणनीति के साथ उतरेंगी। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से बंगाली प्रवासियों के लिए, पश्चिम बंगाल की यह राजनीतिक हलचल गहरी चिंता और रुचि का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे बंगाली समुदाय के लोग अक्सर राज्य की स्थिरता और विकास को लेकर चर्चा करते हैं। ममता बनर्जी का यह नया संकल्प न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि विदेशों में बैठे उन निवेशकों और प्रवासियों के दृष्टिकोण को भी बदलेगा जो बंगाल में लोकतांत्रिक मजबूती की उम्मीद रखते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी अब पुराने और थके हुए चेहरों के बजाय युवा और निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर दांव लगा सकती हैं। उनका यह कहना कि "जो जाना चाहते हैं, जा सकते हैं," दर्शाता है कि वह अब पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं करेंगी। 2026 का चुनाव अब केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के लिए अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने और उसे पुनर्जीवित करने की एक व्यक्तिगत लड़ाई बन गया है।
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