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अमेरिका का नया वीजा नियम: भारतीय छात्रों के प्रवास पर लग सकती है समय सीमा
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 02:11 am

व्हाइट हाउस ने एक नए आव्रजन नियम को मंजूरी दी है जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' की सुविधा को खत्म कर समय-समय पर वीजा विस्तार अनिवार्य बना सकता है।
अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। व्हाइट हाउस ने एक ऐसे प्रस्तावित आव्रजन नियम को हरी झंडी दे दी है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि को सीमित कर सकता है। इस नए बदलाव के तहत, छात्रों को अब देश में बने रहने के लिए समय-समय पर वीजा विस्तार (Visa Extension) के लिए आवेदन करना होगा। यह कदम दशकों से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) प्रणाली को बदलने की तैयारी है, जो छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने तक बिना किसी अतिरिक्त मंजूरी के रहने की अनुमति देती थी।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, भारतीय छात्र तब तक अमेरिका में कानूनी रूप से रह सकते हैं जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम का पालन कर रहे हैं और सक्रिय रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद, छात्रों के वीजा पर एक निश्चित समाप्ति तिथि (Fixed End Date) दर्ज की जाएगी। यदि छात्र का कोर्स उस अवधि से आगे बढ़ता है, तो उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग से फिर से अनुमति लेनी होगी। इस प्रक्रिया से न केवल प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि छात्रों के लिए वित्तीय और मानसिक अनिश्चितता भी पैदा होगी।
भारत वर्तमान में अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। हाल के वर्षों में भारतीय छात्रों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है, जो मुख्य रूप से एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) पाठ्यक्रमों की ओर आकर्षित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से सबसे अधिक प्रभावित भारतीय छात्र ही होंगे, क्योंकि कई बार शोध कार्य या विशेष पाठ्यक्रमों में उम्मीद से अधिक समय लग जाता है। अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और बायोमेट्रिक्स की आवश्यकता छात्रों के लिए एक नई चुनौती बन सकती है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर छात्र वीजा नियमों को कड़ा किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां की सरकार ने भी हाल ही में 'जेनुइन स्टूडेंट' टेस्ट और सख्त वीजा स्क्रीनिंग जैसे कदम उठाए हैं। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका, दोनों ही देश भारतीय छात्रों के पसंदीदा गंतव्य रहे हैं, लेकिन अब दोनों जगह प्रवास के रास्ते कठिन होते दिख रहे हैं। मेलबर्न और सिडनी में बसे भारतीय परिवारों, जिनके रिश्तेदार अमेरिका में पढ़ रहे हैं, के लिए यह चिंता का विषय है कि क्या छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद वहां रुक पाएंगे या नहीं।
आलोचकों का तर्क है कि इस नियम से अमेरिका की 'सॉफ्ट पावर' कम हो सकती है और प्रतिभावान छात्र अन्य देशों का रुख कर सकते हैं। वहीं, नियम के समर्थकों का कहना है कि इससे आव्रजन प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। फिलहाल, भारतीय छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालयों के संपर्क में रहें और किसी भी आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें। यह नियम कब से पूरी तरह प्रभावी होगा, इसकी विस्तृत जानकारी आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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