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चीन की मदद से पाकिस्तान की सैटेलाइट क्षमता में भारी वृद्धि, भारत की बढ़ी चिंता

ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 05:00 am
चीन की मदद से पाकिस्तान की सैटेलाइट क्षमता में भारी वृद्धि, भारत की बढ़ी चिंता

पाकिस्तान ने पिछले 16 महीनों में छह सैटेलाइट लॉन्च कर अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाई है, जिससे दक्षिण एशिया में सुरक्षा संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं।

पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी, स्पार्को (SUPARCO) ने अपनी पारंपरिक सुस्ती को छोड़ते हुए पिछले 16 महीनों में अंतरिक्ष गतिविधियों में अभूतपूर्व तेजी दिखाई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस छोटी अवधि के भीतर छह उपग्रह (सैटेलाइट) लॉन्च किए हैं। चीन के रणनीतिक और तकनीकी सहयोग से संचालित यह अभियान भारत की सीमाओं और सैन्य गतिविधियों पर पाकिस्तान की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों के लिए यह गति इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि पिछले छह दशकों में पाकिस्तान ने कुल मिलाकर केवल नौ मिशन ही पूरे किए थे। अंतरिक्ष क्षेत्र में इस अचानक आई तेजी के पीछे बीजिंग का हाथ स्पष्ट नजर आ रहा है। यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी 'गगनयान' और 'चंद्रयान' जैसी परियोजनाओं के साथ अंतरिक्ष की वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन नए उपग्रहों के माध्यम से पाकिस्तान अब भारतीय सेना के मूवमेंट, रणनीतिक ठिकानों और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर वास्तविक समय (रियल-टाइम) में नजर रखने में सक्षम हो गया है। चीन द्वारा प्रदान किए गए उन्नत सेंसिंग और इमेजिंग डेटा से लैस ये सैटेलाइट्स न केवल खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करेंगे, बल्कि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान की मिसाइल गाइडेंस प्रणाली को भी सटीक बनाएंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और रक्षा विशेषज्ञों के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में चीन के बढ़ते दखल और पाकिस्तान के साथ उसकी गहरी होती 'सदाबहार दोस्ती' क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई चुनौतियां पेश कर रही है। कैनबरा में रक्षा नीति पर काम करने वाले विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह अंतरिक्ष विस्तार पूरी तरह से चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' और सैन्य सहयोग का हिस्सा है। फिलहाल, भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा एजेंसियां निश्चित रूप से पड़ोसी देश की इस नई क्षमता पर पैनी नजर रख रही हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन या समुद्र पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर तय किए जाएंगे।
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