राजनीति
संसद का मानसून सत्र: पीएम मोदी के संबोधन पर कांग्रेस का तीखा हमला, 'घिसे-पिटे' भाषण और ज्वलंत मुद्दों की अनदेखी का आरोप
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 10:35 pm

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को पुरानी बातों का दोहराव बताते हुए नीट और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेरा।
भारतीय संसद का मानसून सत्र सोमवार को हंगामेदार तरीके से शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक उद्घाटन संबोधन पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'घिसा-पिटा' करार दिया। रमेश का तर्क है कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने मौजूद गंभीर संकटों और ज्वलंत मुद्दों को नजरअंदाज करते हुए केवल औपचारिकताएं निभाई हैं।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों में सबसे प्रमुख नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताएं हैं। जयराम रमेश ने कहा कि देश का युवा सड़कों पर है और भविष्य को लेकर चिंतित है, लेकिन प्रधानमंत्री के संबोधन में इस पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके अलावा, विपक्षी दल ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी दान विवादों और केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार इन संवेदनशील विषयों पर चर्चा करने से बच रही है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र की शुरुआत से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए एक अलग रुख अपनाया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सत्र को फलदायी बनाने और सार्थक चर्चा में भाग लेने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया कई संघर्षों और युद्धों से जूझ रही है। उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा आयातक देशों, जैसे कि भारत, पर पड़ने वाले इसके आर्थिक प्रभावों की ओर इशारा किया। मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र देश की प्रगति के लिए नए अवसर पैदा करेगा और विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय (डायस्पोरा) के लिए भारत का संसदीय घटनाक्रम अत्यधिक महत्व रखता है। भारत की आर्थिक स्थिरता और वहां की नीतियां सीधे तौर पर भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करती हैं। विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और शिक्षा जैसे मुद्दे, जिन पर संसद में बहस छिड़ी है, प्रवासी भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी प्रासंगिक हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिक अक्सर भारत की घरेलू राजनीति पर पैनी नजर रखते हैं, क्योंकि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और व्यापारिक हितों को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 18वीं लोकसभा का यह सत्र सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा। विपक्ष, जो पहले से अधिक मजबूत होकर उभरा है, महंगाई, बेरोजगारी और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन अपनी विकास योजनाओं और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को आधार बनाकर पलटवार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद में विधायी कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो पाते हैं या फिर गतिरोध की स्थिति बनी रहती है।
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