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दिल्ली: एमसीडी के सहयोग से पीएम विश्वकर्मा योजना में 41,000 से अधिक कारीगरों का पंजीकरण

ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 08:35 am
दिल्ली: एमसीडी के सहयोग से पीएम विश्वकर्मा योजना में 41,000 से अधिक कारीगरों का पंजीकरण

दिल्ली नगर निगम (MCD) के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 41,411 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 1,015 ने बुनियादी कौशल प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।

दिल्ली नगर निगम (MCD) और राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई (SLPMU) के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय राजधानी में 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना' को बड़ी सफलता मिल रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में अब तक कम से कम 41,411 कारीगरों ने इस योजना के तहत अपना पंजीकरण कराया है। यह योजना पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों को वित्तीय सहायता और आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। पंजीकृत लाभार्थियों में से 1,015 कारीगरों ने अपना बुनियादी कौशल प्रशिक्षण (Basic Skill Training) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसके अलावा, योजना के अगले चरण के रूप में 117 लाभार्थियों को आधुनिक टूलकिट भी प्रदान किए गए हैं। एमसीडी के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल कारीगरों की आय बढ़ाना है, बल्कि उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालना भी है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना मुख्य रूप से 18 पारंपरिक व्यापारों पर केंद्रित है, जिसमें बढ़ई, लोहार, कुम्हार, राजमिस्त्री, मूर्तिकार और दर्जी जैसे वर्ग शामिल हैं। इन कारीगरों को योजना के तहत पहचान पत्र, कौशल उन्नयन, टूलकिट प्रोत्साहन और संपार्श्विक-मुक्त ऋण (Collateral-free loans) जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। दिल्ली में एमसीडी इन कारीगरों की पहचान करने और उन्हें इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने में एक सेतु की भूमिका निभा रही है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह समाचार विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प के प्रति गहरा लगाव रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक उत्सवों और 'इंडिया मेलों' में इन्हीं विश्वकर्माओं द्वारा निर्मित कलाकृतियों की भारी मांग रहती है। भारत में जमीनी स्तर पर इन कारीगरों के सशक्तिकरण से न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत संरक्षित होगी, बल्कि निर्यात के लिए उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प भी उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से भारत के असंगठित क्षेत्र को संगठित करने में मदद मिलेगी। 41,000 से अधिक पंजीकरण इस बात का प्रमाण हैं कि दिल्ली के सूक्ष्म उद्यमियों में अपनी कार्यक्षमता सुधारने की भारी इच्छा है। केंद्र सरकार और नगर निगम का लक्ष्य आने वाले महीनों में इस संख्या को और अधिक बढ़ाना है ताकि 'विकसित भारत' के संकल्प में शिल्पकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
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