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जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: क्या है 'अधर पणा'? जानिए भगवान को अर्पित किए जाने वाले इस पवित्र पेय का रहस्य और महत्व
ICN24 Newsroom 17 जुल॰ 2026, 12:32 am

ओडिशा की प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा के दौरान 'अधर पणा' एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें भगवान को एक विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है।
ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और अटूट आस्था का संगम है। साल 2026 की रथ यात्रा की तैयारियों के बीच, श्रद्धालु एक विशेष अनुष्ठान 'अधर पणा' (Adhara Pana) के बारे में जानने को उत्सुक हैं। यह रस्म रथ यात्रा के समापन चरण के दौरान निभाई जाती है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) से वापस लौटकर सिंह द्वार पर अपने रथों पर विराजमान होते हैं।
'अधर पणा' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— 'अधर' जिसका अर्थ है 'होंठ' और 'पणा' जिसका अर्थ है 'मीठा पेय'। यह अनुष्ठान मुख्य मंदिर में देवताओं के प्रवेश (नीलाद्रि बिजे) से ठीक पहले किया जाता है। इस अनुष्ठान के तहत, प्रत्येक रथ पर तीन-तीन बड़े मिट्टी के पात्रों में विशेष रूप से तैयार किया गया मीठा पेय रखा जाता है। इन पात्रों की ऊंचाई इतनी रखी जाती है कि वे देवताओं के होंठों (अधर) तक पहुंच सकें, इसीलिए इसका नाम 'अधर पणा' पड़ा है।
इस पवित्र पेय को बनाने की विधि भी अत्यंत सात्विक और पारंपरिक होती है। इसमें दूध, छेना (पनीर), चीनी, कद्दूकस किया हुआ अदरक, काली मिर्च, इलायची, कपूर और केले जैसे नौ मुख्य घटकों का मिश्रण किया जाता है। इस पेय को तैयार करने की जिम्मेदारी मंदिर के विशिष्ट सेवायतों की होती है, जो पूरी शुद्धता के साथ इसे तैयार करते हैं।
अधर पणा अनुष्ठान का एक गहरा आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है। जैसे ही यह पेय देवताओं को अर्पित किया जाता है, उन विशाल मिट्टी के पात्रों को रथ पर ही तोड़ दिया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, रथों के चारों ओर कई सूक्ष्म आत्माएं, चंडी-चामुंडा और पार्श्व देवता मौजूद होते हैं जिन्होंने रथ यात्रा के दौरान देवताओं की रक्षा की होती है। इन पात्रों को तोड़ने से वह मीठा पेय रथ की सतह पर फैल जाता है, जिसे ये अदृश्य शक्तियां ग्रहण करती हैं। माना जाता है कि इस अनुष्ठान से इन आत्माओं को 'मोक्ष' प्राप्त होता है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ओडिया प्रवासियों के लिए पुरी की रथ यात्रा एक भावनात्मक जुड़ाव का विषय है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में जगन्नाथ मंदिरों द्वारा आयोजित रथ यात्राओं में भी इन परंपराओं को सहेजने का प्रयास किया जाता है। सिडनी के रूस (Ruse) स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हर साल सैकड़ों श्रद्धालु इस उत्सव का हिस्सा बनते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भक्त भले ही भौतिक रूप से पुरी से दूर हों, लेकिन वे डिजिटल माध्यमों और स्थानीय आयोजनों के जरिए इन सूक्ष्म अनुष्ठानों की बारीकियों से जुड़े रहते हैं।
रथ यात्रा 2026 के अवसर पर, अधर पणा का यह दृश्य एक बार फिर लाखों भक्तों को मंत्रमुग्ध करेगा। यह अनुष्ठान हमें सिखाता है कि भक्ति में केवल देवताओं का ही नहीं, बल्कि उन सभी सूक्ष्म शक्तियों का भी सम्मान किया जाता है जो सृष्टि के संतुलन में सहायक होती हैं।
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