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रेखा और विश्वजीत: वह विवादित चुंबन जिसके लिए नहीं ली गई थी अभिनेत्री की सहमति

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:26 pm
रेखा और विश्वजीत: वह विवादित चुंबन जिसके लिए नहीं ली गई थी अभिनेत्री की सहमति

1969 की फिल्म 'अनजाना सफर' के सेट पर 15 वर्षीय रेखा के साथ हुए उस हादसे की कहानी, जिसने बॉलीवुड में सहमति और कार्यस्थल सुरक्षा पर दशकों पुरानी बहस छेड़ दी थी।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में रेखा का नाम एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में दर्ज है जिन्होंने अपनी शर्तों पर अपनी पहचान बनाई। लेकिन उनके करियर की शुरुआत एक ऐसे कड़वे अनुभव से हुई थी, जिसे आज के दौर में कार्यस्थल पर उत्पीड़न (workplace harassment) की श्रेणी में रखा जाएगा। यह घटना 1969 की फिल्म 'अनजाना सफर' (बाद में 'दो शिकारी' के नाम से रिलीज हुई) के सेट पर घटी थी, जहाँ महज 15 साल की रेखा को उनके सह-कलाकार विश्वजीत ने बिना पूर्व सूचना या सहमति के लगभग पांच मिनट तक चूमा था। उस समय के घटनाक्रम के अनुसार, निर्देशक राजा नवाठे ने विश्वजीत के साथ मिलकर एक योजना बनाई थी, जिसकी जानकारी रेखा को नहीं दी गई थी। जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया और निर्देशक ने 'एक्शन' बोला, विश्वजीत ने रेखा को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उन्हें चूमने लगे। फिल्म की यूनिट के सामने यह सब पांच मिनट तक चलता रहा, जबकि निर्देशक ने 'कट' नहीं बोला। रेखा, जो उस समय फिल्म उद्योग में बिल्कुल नई थीं और कम उम्र की थीं, स्तब्ध रह गईं। उन्होंने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली थीं और उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन कैमरा चलता रहा। इस घटना के सालों बाद, विश्वजीत ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने केवल निर्देशक के आदेशों का पालन किया था। उनके अनुसार, यह फिल्म की मांग थी और निर्देशक चाहते थे कि दृश्य में स्वाभाविकता आए। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या स्वाभाविकता के नाम पर किसी कलाकार की शारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन करना उचित है? उस दौर में 'सहमति' (consent) जैसे शब्द फिल्म निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे, और अक्सर अभिनेत्रियों को ऐसी परिस्थितियों में चुप रहने के लिए मजबूर किया जाता था। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह कहानी आज भी प्रासंगिक है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में होने वाले भारतीय फिल्म महोत्सवों और चर्चाओं में अक्सर कार्यस्थल पर सुरक्षा और लिंग समानता के मुद्दों पर बात होती है। रेखा के साथ हुई यह घटना हमें याद दिलाती है कि फिल्म उद्योग में 'इंटीमेसी कोच' और कड़े सुरक्षा नियमों की आवश्यकता क्यों पड़ी। यह कहानी केवल एक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष का प्रतीक है जिससे गुजरकर आज की अभिनेत्रियां अपनी आवाज उठाने में सक्षम हुई हैं। भले ही उस समय 'लाइफ' पत्रिका के अंतरराष्ट्रीय संस्करण ने इस दृश्य को कवर किया और फिल्म सेंसर बोर्ड के साथ लंबी कानूनी लड़ाई में फंसी रही, लेकिन रेखा ने इस सदमे को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को बॉलीवुड की 'उमराव जान' के रूप में स्थापित किया, लेकिन 'अनजाना सफर' का वह सेट हमेशा भारतीय सिनेमा के एक ऐसे अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहाँ कला के नाम पर गरिमा को दांव पर लगाया गया था।
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