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ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम: 250 से अधिक प्रवासियों की नागरिकता छीनने की तैयारी, भारतीय मूल के अमेरिकी भी निशाने पर

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:53 am
ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम: 250 से अधिक प्रवासियों की नागरिकता छीनने की तैयारी, भारतीय मूल के अमेरिकी भी निशाने पर

ट्रंप प्रशासन वित्त वर्ष 2026 तक 250 से अधिक प्रवासियों की नागरिकता रद्द करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें भारतीय मूल के नागरिक भी शामिल हैं।

वॉशिंगटन: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने अप्रवासियों के खिलाफ अपनी नीतियों को और सख्त करते हुए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, सरकार उन विदेशी मूल के प्राकृतिक (naturalised) अमेरिकी नागरिकों की पहचान कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर अपनी नागरिकता प्राप्त करते समय धोखाधड़ी की थी या किसी कानूनी जानकारी को छुपाया था। इस अभियान के तहत अक्टूबर 2026 तक कम से कम 250 लोगों की नागरिकता रद्द करने (denaturalisation) के मामले दर्ज करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्रवाई का सीधा असर भारतीय समुदाय पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की एक बड़ी आबादी बसी हुई है। गृह मंत्रालय और न्याय विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच का मुख्य केंद्र वे लोग हैं जिन्होंने पहले के निर्वासन (deportation) आदेशों को छुपाया, अपनी पहचान बदली या गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने के बावजूद नागरिकता हासिल की। भारतीय मूल के कई नागरिक, जो दशकों से अमेरिका में रह रहे हैं, अब इस नई जांच के दायरे में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता छीनने की प्रक्रिया कानूनी रूप से काफी जटिल होती है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसके लिए संसाधनों और कानूनी टीमों में इजाफा किया है। इस प्रक्रिया को 'डिनैचुरलाइजेशन' कहा जाता है, जिसके तहत सरकार संघीय अदालत में यह साबित करती है कि संबंधित व्यक्ति ने अपनी पात्रता के बारे में झूठ बोला था। यदि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो उस व्यक्ति की अमेरिकी नागरिकता तुरंत समाप्त हो जाती है और उसे वापस उसके मूल देश भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि यह कानून केवल अमेरिका तक सीमित है, लेकिन वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों के बीच नागरिकता की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के वर्षों में चरित्र और सुरक्षा आधार पर नागरिकता आवेदनों की जांच सख्त हुई है। मेलबर्न और सिडनी में रहने वाले कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार अमेरिका में बसे हैं, और इस नीतिगत बदलाव ने वहां रहने वाले उनके परिजनों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे प्रवासियों को डराने वाला बताया है। उनका तर्क है कि छोटी तकनीकी गलतियों या दशकों पुराने मामलों को आधार बनाकर नागरिकता छीनना गलत है। वहीं, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह 'कानून के शासन' को बनाए रखने और आव्रजन प्रणाली की पवित्रता की रक्षा के लिए आवश्यक है। आगामी महीनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक विवाद और बढ़ने की उम्मीद है।
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