लाइव
इमिकास्ट
इमिकास्ट

अमेरिका: बाइडन द्वारा नियुक्त जज ने आव्रजन अदालतों में ICE गिरफ्तारियों पर लगाई रोक, शुरू हुई तीखी बहस

ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 01:57 pm
अमेरिका: बाइडन द्वारा नियुक्त जज ने आव्रजन अदालतों में ICE गिरफ्तारियों पर लगाई रोक, शुरू हुई तीखी बहस

कैलिफोर्निया के एक संघीय न्यायाधीश ने आव्रजन अदालतों में ICE द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारियों पर देशव्यापी रोक लगा दी है, जिससे आव्रजन नीतियों पर नई बहस छिड़ गई है।

अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन द्वारा नियुक्त एक संघीय न्यायाधीश ने आव्रजन प्रवर्तन के संबंध में एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला न्यायाधीश पी. केसी पिट्स ने मंगलवार शाम को एक देशव्यापी प्रारंभिक निषेधाज्ञा (injunction) जारी की। इस फैसले के तहत, आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) को अब आव्रजन अदालतों में गिरफ्तारियां करने से रोक दिया गया है। इसके साथ ही, अदालत ने उन नीतियों पर भी रोक लगा दी है जो आव्रजन बंदियों को अल्पकालिक हिरासत केंद्रों में लंबी अवधि तक रखने की अनुमति देती थीं। यह निर्णय पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लागू की गई और वर्तमान प्रशासन के तहत कुछ संशोधनों के साथ जारी प्रवर्तन रणनीतियों के खिलाफ एक बड़ी कानूनी बाधा माना जा रहा है। न्यायाधीश पिट्स ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अदालतों जैसे संवेदनशील स्थानों पर गिरफ्तारी की कार्रवाई से न्याय प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित होती है। आलोचकों का तर्क है कि जब लोग अपनी सुनवाई के लिए अदालत आते हैं और वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है, तो इससे अन्य प्रवासियों में डर का माहौल पैदा होता है, जिससे वे कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल होने से कतराने लगते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर आव्रजन कानूनों और मानवीय अधिकारों के बीच चल रहे संतुलन को दर्शाती है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की अपनी कठोर सीमा सुरक्षा नीतियां हैं, लेकिन अमेरिका में होने वाले ये बदलाव अक्सर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और नीति निर्माताओं के बीच चर्चा का विषय बनते हैं। भारतीय मूल के कई परिवार अमेरिका में भी बसे हुए हैं, और वहां की आव्रजन नीतियों में आने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर प्रवासी समुदाय को प्रभावित करता है। इस फैसले की घोषणा के तुरंत बाद ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। प्रवर्तन समर्थकों और रिपब्लिकन सांसदों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह अवैध आव्रजन को बढ़ावा देगा और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बांधने जैसा है। उनका कहना है कि अदालतों को 'सुरक्षित पनाहगाह' के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह सुनिश्चित करेगा कि प्रवासी बिना किसी डर के अपनी अदालती तारीखों पर उपस्थित हो सकें और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया का लाभ मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला अब ऊपरी अदालतों में जाने की संभावना है। बाइडन प्रशासन के लिए यह एक जटिल स्थिति है, क्योंकि एक तरफ उन्हें अपनी ही पार्टी के उदारवादी धड़े और न्यायपालिका के फैसलों का सम्मान करना है, वहीं दूसरी तरफ सीमा सुरक्षा को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव का सामना भी करना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निषेधाज्ञा स्थायी बनी रहती है या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करता है। फिलहाल, यह फैसला उन हजारों प्रवासियों के लिए एक राहत की खबर है जो अपनी अदालती कार्यवाही के दौरान गिरफ्तारी के डर में जी रहे थे।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

पॉलीन हैनसन की प्रवासन में भारी कटौती की मांग, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को कड़ा करने पर दिया जोर
इमिग्रेशन

पॉलीन हैनसन की प्रवासन में भारी कटौती की मांग, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नियमों को कड़ा करने पर दिया जोर

वन नेशन की नेता पॉलीन हैनसन ने ऑस्ट्रेलिया के स्थायी प्रवासन कोटा को घटाकर 1.3 लाख करने की मांग की है और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ आने वाले परिवारों पर सवाल उठाए हैं।

6 अग॰ 2026, 10:14 am
वन नेशन का बड़ा वादा: ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों से 'वेलकम टू कंट्री' हटाने और देशभक्ति पर जोर देने की तैयारी
इमिग्रेशन

वन नेशन का बड़ा वादा: ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों से 'वेलकम टू कंट्री' हटाने और देशभक्ति पर जोर देने की तैयारी

वन नेशन नेता पॉलीन हैनसन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में देशभक्ति आधारित पाठ्यक्रम और 'वेलकम टू कंट्री' समारोहों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।

30 जुल॰ 2026, 07:45 am
विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप की बड़ी पहल: ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद बन सकती है पहली बड़ी तेल रिफाइनरी
इमिग्रेशन

विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप की बड़ी पहल: ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद बन सकती है पहली बड़ी तेल रिफाइनरी

भारतीय मूल के उद्यमी विकास रम्बल के पर्डामन ग्रुप ने ऑस्ट्रेलिया की ईंधन सुरक्षा और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कर्रथा में एक नई तेल रिफाइनरी का प्रस्ताव दिया है।

29 जुल॰ 2026, 05:27 am