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इमिग्रेशन अदालतों में गिरफ्तारियों पर देशव्यापी रोक: अमेरिकी जज का बड़ा फैसला

ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 02:27 pm
इमिग्रेशन अदालतों में गिरफ्तारियों पर देशव्यापी रोक: अमेरिकी जज का बड़ा फैसला

कैलिफोर्निया के एक संघीय न्यायाधीश ने देशव्यापी आदेश जारी करते हुए इमिग्रेशन अदालतों और उनके आसपास होने वाली गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक संघीय न्यायाधीश ने एक ऐतिहासिक फैसले में देश भर की इमिग्रेशन अदालतों में होने वाली नागरिक गिरफ्तारियों पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश पी. केसी पिट्स द्वारा जारी किया गया यह 71 पन्नों का आदेश जो बाइडन प्रशासन के कार्यकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। यह फैसला विशेष रूप से उन नीतियों को लक्षित करता है जो ट्रंप प्रशासन के दौरान मजबूती से लागू की गई थीं, जिसके तहत इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंट अदालती कार्यवाही के दौरान या अदालतों के बाहर से संदिग्धों को हिरासत में ले लेते थे। न्यायाधीश पिट्स ने अपने फैसले में तर्क दिया कि अदालतों के भीतर या उनके निकट इस तरह की गिरफ्तारियां न्यायिक प्रणाली की गरिमा और प्रभावशीलता को बाधित करती हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि जब लोग इस डर में रहते हैं कि अदालत जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, तो वे गवाही देने, अपराधों की रिपोर्ट करने या कानूनी संरक्षण प्राप्त करने से कतराते हैं। यह 'चिलिंग इफेक्ट' न केवल प्रवासियों के लिए बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था के लिए हानिकारक है। यह कानूनी विवाद उस समय और भी जटिल हो गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस बात पर चिंता जताई है कि क्या जिला स्तर के न्यायाधीशों को देशव्यापी (Nationwide) आदेश जारी करने का अधिकार होना चाहिए। इस फैसले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसे जल्द ही उच्च न्यायालयों में चुनौती दी जा सकती है। आलोचकों का तर्क है कि जिला न्यायाधीशों द्वारा पूरे देश के लिए नीति निर्धारित करना न्यायिक अतिरेक का उदाहरण है, जबकि समर्थकों का कहना है कि मानवाधिकारों और अदालती सुरक्षा के लिए ऐसे कदम अनिवार्य हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण संदर्भ रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भी आव्रजन नीतियों और अदालती प्रक्रियाओं के बीच संतुलन हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में 'बॉर्डर फोर्स' की कार्यप्रणाली अमेरिका से भिन्न है, लेकिन 'एक्सेस टू जस्टिस' (न्याय तक पहुंच) एक सार्वभौमिक मुद्दा है। अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए, जिनमें से कई वीज़ा जटिलताओं या नागरिकता संबंधी अपीलों के लिए अदालतों पर निर्भर हैं, यह आदेश एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार अमेरिका में बसे हुए हैं। वहां की आव्रजन नीतियों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक स्तर पर प्रवासी समुदायों के विश्वास को प्रभावित करता है। यदि अदालतों को सुरक्षित स्थान के रूप में मान्यता मिलती है, तो यह प्रवासियों को बिना किसी डर के कानूनी सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि संघीय सरकार इस आदेश के खिलाफ अपील करती है या इसे नई मानक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करती है।
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