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अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज: चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमला, निगरानी टॉवर हुआ जमींदोज

ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 10:34 am
अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज: चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमला, निगरानी टॉवर हुआ जमींदोज

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर हमला कर एक मुख्य निगरानी टॉवर को तबाह कर दिया है।

मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को पुष्टि की है कि ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर हवाई हमला कर एक प्रमुख निगरानी टॉवर (surveillance tower) को नष्ट कर दिया गया है। यह हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने तेहरान पर विश्व ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ ढीली करने का दबाव बनाया था। अमेरिकी सेना ने पिछले सात रातों से ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को जारी रखा है। शुक्रवार को हुए हमलों में केवल चाबहार ही नहीं, बल्कि ईरान के कई पुलों और ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और बुनियादी ढांचे को कमजोर करना है। इस युद्ध की शुरुआत करीब चार महीने पहले हुई थी और एक अंतरिम युद्धविराम के विफल होने के बाद अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है। ईरान ने इन हमलों का जवाब अमेरिकी सहयोगियों पर मिसाइल दागकर दिया है। कतर, जो इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, और कुवैत जैसे देशों को निशाना बनाया गया है। कुवैत में एक जल विलवणीकरण संयंत्र (water desalination plant) के क्षतिग्रस्त होने की खबर है, जिससे स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई सैनिकों के घायल होने की बात स्वीकार की है। चाबहार बंदरगाह पर हमला भारत के लिए भी चिंता का विषय है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास में निवेश किया है ताकि अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक मार्ग सुगम हो सके। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि मध्य पूर्व में अशांति का मतलब है वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतें 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो पिछले एक महीने का उच्चतम स्तर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए दावा किया कि युद्ध योजना के अनुसार चल रहा है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। हालांकि, उन पर युद्ध को जल्द समाप्त करने और मध्य पूर्व में लंबे समय तक फंसने से बचने का राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में आई भारी गिरावट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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