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H-1B वीजा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी: अमेरिकी सांसद ने पेश किया नया विधेयक, भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा गहरा असर
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 06:30 pm

अमेरिकी सांसद चिप रॉय ने 'अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट' पेश किया है, जो एच-1बी वीजा के लॉटरी सिस्टम को खत्म कर वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव देता है।
वाशिंगटन में रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने एक नया विधेयक पेश किया है जो अमेरिका के प्रतिष्ठित एच-1बी वीजा कार्यक्रम की रूपरेखा को पूरी तरह से बदलने का प्रस्ताव रखता है। 'अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट 2026' नामक यह विधेयक यदि कानून बनता है, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, जो वर्तमान में इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थी हैं।
इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में प्रचलित 'लॉटरी सिस्टम' को समाप्त करना है। इसके स्थान पर, एक ऐसी प्रणाली लाने का सुझाव दिया गया है जो अधिक वेतन वाले आवेदकों को प्राथमिकता देगी। सांसद चिप रॉय के अनुसार, पिछले चार दशकों से एच-1बी वीजा का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे अमेरिकी स्टेम (STEM) श्रमिकों की अनदेखी कर सस्ते विदेशी श्रम को बढ़ावा मिला है। उन्होंने तर्क दिया कि यह बिल योग्यता को प्राथमिकता देगा और वास्तविक वेतन मानकों को लागू करेगा।
विधेयक में कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। सबसे प्रमुख बदलाव वीजा की अवधि को लेकर है; वर्तमान में एच-1बी वीजा छह साल तक के लिए मान्य होता है, जिसे घटाकर केवल दो साल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, यह बिल किसी भी एक देश के लिए वार्षिक कोटा केवल सात प्रतिशत तक सीमित करने की बात करता है। यह भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि वर्तमान में भारत से आने वाले आवेदकों की संख्या कुल कोटा में काफी बड़ी हिस्सेदारी रखती है।
प्रस्तावित नियमों के तहत, अमेरिकी नियोक्ताओं को अब यह प्रमाणित करना होगा कि उन्होंने उस पद के लिए पहले किसी योग्य अमेरिकी नागरिक को खोजने का प्रयास किया है। साथ ही, जिन कंपनियों ने हाल ही में छंटनी की है, उन्हें एच-1बी श्रमिकों को नियुक्त करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। विधेयक में ओपशनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम को भी समाप्त करने का प्रस्ताव है, जो विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि अमेरिका में वीजा नियमों के सख्त होने पर कई भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया या कनाडा जैसे देशों का रुख करते हैं। यदि अमेरिका अपनी सीमाओं को कुशल श्रमिकों के लिए संकुचित करता है, तो ऑस्ट्रेलिया के 'ग्लोबल टैलेंट' और 'कुशल प्रवासन' कार्यक्रमों में आवेदकों की संख्या में वृद्धि देखी जा सकती है, जिससे वहां प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
इस बिल को कई इमिग्रेशन प्रतिबंधक समूहों का समर्थन प्राप्त है, जिनका मानना है कि इससे अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा होगी। हालांकि, टेक जगत और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से अमेरिका में प्रतिभाओं की कमी हो सकती है और वैश्विक नवाचार पर असर पड़ सकता है। फिलहाल यह विधेयक शुरुआती चरण में है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होना अनिवार्य है।
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