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धार्मिक मान्यताओं के कारण नौकरी से निकाली गई फिजिशियन असिस्टेंट को मिला 4.10 लाख डॉलर का मुआवजा
ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 06:35 am

मिशिगन की एक फिजिशियन असिस्टेंट, जिन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण अस्पताल की जेंडर पॉलिसी मानने से इनकार करने पर बर्खास्त कर दिया गया था, ने 410,000 डॉलर का कानूनी समझौता हासिल किया है।
अमेरिका के मिशिगन राज्य से एक महत्वपूर्ण कानूनी मामला सामने आया है, जहां एक फिजिशियन असिस्टेंट (PA) को अपनी धार्मिक मान्यताओं के पक्ष में खड़े होने के बाद भारी मुआवजा मिला है। वैलेरी क्लूस्टरमैन, जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन हेल्थ-वेस्ट (UMHW) में 17 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं, को अगस्त 2021 में उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया था। अब, एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, अस्पताल प्रशासन ने उन्हें 410,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 3.40 करोड़ भारतीय रुपये) का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब अस्पताल ने नई नीतियां लागू कीं, जिसमें स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए मरीजों के पसंदीदा सर्वनामों (preferred pronouns) का उपयोग करना और जेंडर बदलने से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए रेफरल देना अनिवार्य कर दिया गया था। क्लूस्टरमैन, जो एक ईसाई हैं, ने स्पष्ट किया कि उनकी धार्मिक मान्यताएं उन्हें ऐसे कार्यों में शामिल होने की अनुमति नहीं देतीं। उन्होंने इन नीतियों से छूट (exemption) मांगी थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उनकी मांग को ठुकरा दिया और उन्हें 'भेदभावपूर्ण व्यवहार' का आरोप लगाते हुए नौकरी से निकाल दिया।
क्लूस्टरमैन ने 2022 में अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दायर किया, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि उनकी बर्खास्तगी उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनके कानूनी दल ने अदालत में दलील दी कि अस्पताल ने उनके विवेक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं किया और उन्हें पेशेवर रूप से प्रताड़ित किया। इस मामले ने अमेरिका सहित वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कार्यस्थल नीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक समाज में, जहां भारतीय मूल के हजारों लोग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, धार्मिक मान्यताओं और पेशेवर कर्तव्यों के बीच संतुलन एक संवेदनशील विषय रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भी 'धार्मिक भेदभाव विधेयक' (Religious Discrimination Bill) पर चर्चाएं होती रही हैं, जो विश्वास और पेशे के टकराव की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक संकेत है कि वे कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताओं को अनदेखा नहीं कर सकते। हालांकि अस्पताल ने इस समझौते में किसी भी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन मुआवजे की राशि यह दर्शाती है कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत विश्वास का सम्मान करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो सकता है। वैलेरी क्लूस्टरमैन ने इस जीत को अपनी आस्था की जीत बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे अन्य पेशेवरों को भी अपने मूल्यों पर टिके रहने का साहस मिलेगा।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की नौकरी का नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संस्थागत आदेशों के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रतीक है। आने वाले समय में, यह फैसला चिकित्सा जगत में नीति निर्धारण और कर्मचारी अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जाएगा।
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