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अमेरिका: ग्रीन कार्ड धारकों के निर्वासन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कुछ अपराधों पर देश निकाला होगा आसान
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 01:41 pm

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में आव्रजन अधिकारियों के लिए उन ग्रीन कार्ड धारकों को निर्वासित करना आसान बना दिया है, जिन पर 'नैतिक अधमता' से जुड़े अपराधों का आरोप है।
वॉशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जो देश में रह रहे कानूनी स्थायी निवासियों, जिन्हें आमतौर पर 'ग्रीन कार्ड धारक' कहा जाता है, के निर्वासन की प्रक्रिया को सरल बनाता है। अदालत के इस फैसले के बाद अब उन प्रवासियों को देश से बाहर निकालना आसान हो जाएगा, जो 'नैतिक अधमता' (Moral Turpitude) से जुड़े अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं। यह फैसला आव्रजन अधिकारियों को व्यापक शक्तियां प्रदान करता है और निर्वासन के खिलाफ कानूनी बचाव के रास्तों को सीमित करता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का केंद्र बिंदु यह व्याख्या थी कि क्या कुछ विशिष्ट अपराधों के लिए ग्रीन कार्ड धारकों को बिना लंबी न्यायिक प्रक्रिया के निर्वासित किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई गैर-नागरिक ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है जो सामाजिक मानकों और नैतिकता के विरुद्ध है, तो उसकी स्थायी निवासी की स्थिति उसे निर्वासन से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। 'नैतिक अधमता' की श्रेणी में धोखाधड़ी, चोरी, और जानबूझकर किए गए हिंसक अपराध जैसे मामले शामिल होते हैं। यह शब्द अमेरिकी आव्रजन कानून में दशकों से बहस का विषय रहा है, क्योंकि इसकी परिभाषा काफी व्यापक है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार अमेरिका में बसे हुए हैं। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया की अपनी आव्रजन प्रणाली (विशेष रूप से माइग्रेशन एक्ट की धारा 501) भी इसी तरह के कड़े प्रावधान रखती है, जहां 'चरित्र परीक्षण' में विफल होने पर वीजा रद्द कर दिया जाता है। अमेरिका का यह ताजा फैसला दिखाता है कि विकसित देश अब अपने स्थायी निवासियों के आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन हजारों भारतीय नागरिकों पर असर पड़ सकता है जो अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर रह रहे हैं और किसी कानूनी विवाद में फंसे हैं।
अदालत में इस मामले पर विचार करते समय न्यायाधीशों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। निर्णय के पक्ष में तर्क दिया गया कि जो लोग अमेरिका में रहने का विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं, उन्हें देश के कानूनों का सख्ती से पालन करना चाहिए। दूसरी ओर, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आव्रजन वकीलों ने चिंता जताई है कि यह फैसला उन लोगों के लिए अन्यायपूर्ण हो सकता है जिन्होंने मामूली अपराध किए हैं लेकिन दशकों से अमेरिका में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस फैसले के बाद, अब निर्वासन के मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों के पास अधिक विवेकाधीन शक्तियां होंगी, जिससे अदालती हस्तक्षेप कम हो जाएगा।
निष्कर्षतः, अमेरिका का यह कानूनी बदलाव वैश्विक आव्रजन परिदृश्य में एक सख्त संदेश भेजता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदायों के लिए भी यह एक चेतावनी की तरह है कि स्थायी निवास (PR) का मतलब पूर्ण सुरक्षा नहीं है। आपराधिक रिकॉर्ड किसी भी देश में निर्वासन का आधार बन सकता है। भारतीय समुदाय को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी कानूनी स्थिति और स्थानीय कानूनों के प्रति अधिक सतर्क रहें, क्योंकि एक छोटी सी कानूनी चूक उनके वर्षों के संघर्ष और भविष्य को खतरे में डाल सकती है।
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