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अमेरिकी वीजा कानून भारत को लक्षित नहीं करते, H-1B नियम वैश्विक ढांचे का हिस्सा: अमेरिकी विदेश विभाग
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 06:01 pm
अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनके वीजा कानून और H-1B नियम किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ये एक वैश्विक नीति का हिस्सा हैं।
वाशिंगटन: अमेरिका के विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में भारतीय पेशेवरों और आईटी क्षेत्र की चिंताओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी वीजा कानून विशेष रूप से भारत को लक्षित नहीं करते हैं। अधिकारी ने जोर देकर कहा कि H-1B वीजा सहित सभी आव्रजन नियम एक व्यापक वैश्विक ढांचे का हिस्सा हैं, जिन्हें सभी देशों पर समान रूप से लागू किया जाता है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत में तकनीकी विशेषज्ञों और छात्रों के बीच अमेरिकी वीजा नीतियों को लेकर संशय की स्थिति बनी रहती है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की आव्रजन नीति का प्राथमिक उद्देश्य अपने नागरिकों के लिए रोजगार के अवसरों को सुरक्षित रखना और साथ ही वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना है ताकि आर्थिक विकास और निवेश को बढ़ावा मिल सके।
H-1B वीजा, जो विशेष रूप से भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच लोकप्रिय है, अक्सर बहस का विषय बना रहता है। इस पर टिप्पणी करते हुए अधिकारी ने बताया कि वीजा आवंटन की प्रक्रिया और इसके कड़े नियम केवल भारतीय आवेदकों के लिए नहीं हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक समान मानक है। अमेरिका का मानना है कि विदेशी प्रतिभाएं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, लेकिन इसके साथ ही घरेलू श्रम बाजार के संतुलन को बनाए रखना भी आवश्यक है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। अक्सर ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय पेशेवर वहां से अमेरिका स्थानांतरित होने की योजना बनाते हैं। ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन प्रणाली (जैसे सबक्लास 482) और अमेरिकी H-1B प्रणाली के बीच तुलना अक्सर की जाती है। ऑस्ट्रेलिया की 'पॉइंट्स-बेस्ड' प्रणाली और अमेरिका की 'लॉटरी' आधारित प्रणाली में भिन्नता होने के बावजूद, दोनों देश अब अपने स्थानीय कार्यबल को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आधिकारिक बयानों से उन अफवाहों पर विराम लगेगा जिनमें कहा जाता रहा है कि अमेरिका अपनी वीजा नीतियों के जरिए भारतीय प्रतिभाओं को रोकने का प्रयास कर रहा है। इसके विपरीत, आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले H-1B वीजा का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भारतीय नागरिकों को ही मिलता है।
अंत में, अमेरिकी प्रशासन ने दोहराया कि वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वीजा प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में काम जारी है ताकि योग्य पेशेवरों को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिल सकें।
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