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वन्दे मातरम् विधेयक 2026: राष्ट्रीय गीत को मिलेगा कानूनी संरक्षण, संसद में पेश होगी नई योजना
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 02:33 am

केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में वन्दे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने के लिए विधेयक ला सकती है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत के अपमान पर दंड का प्रावधान होगा।
भारत सरकार आगामी मानसून सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण वैधानिक कदम उठाने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने की योजना बना रही है। इस प्रस्तावित कानून का प्राथमिक उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' को वही कानूनी संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है।
प्रस्तावित विधेयक के तहत, वन्दे मातरम् का जानबूझकर अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। वर्तमान में, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम, 1971 मुख्य रूप से राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और भारत के मानचित्र के अपमान को रोकने पर केंद्रित है। नए संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को भी इस कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा, जिससे इसके गौरव और मर्यादा की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
ऐतिहासिक रूप से, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वन्दे मातरम्' का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक अद्वितीय स्थान रहा है। यह गीत दशकों तक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहा। हालांकि, स्वाधीनता के पश्चात संवैधानिक सभा ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान और 'वन्दे मातरम्' को समान दर्जा देते हुए राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था, लेकिन कानूनी सुरक्षा के मामले में दोनों के बीच एक स्पष्ट अंतर बना रहा। नया विधेयक इसी कानूनी शून्यता को भरने का प्रयास है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में आयोजित होने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों और स्वतंत्रता दिवस समारोहों में 'वन्दे मातरम्' का गायन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय जड़ों से जुड़ाव का एक सशक्त प्रतीक है। प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर यह चर्चा का विषय रहता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान के वैश्विक मानक क्या होने चाहिए। यह कानून विदेशों में भी भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन के बाद अदालतों के पास राष्ट्रीय गीत के अपमान से जुड़े मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश होंगे। पूर्व में, सर्वोच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं जिनमें वन्दे मातरम् को राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की मांग की गई थी। सरकार का यह कदम उन लंबित मांगों और न्यायिक विमर्श को एक तार्किक परिणति देने की दिशा में देखा जा रहा है।
विधेयक के मसौदे में संभवतः कारावास और जुर्माने दोनों के प्रावधान शामिल होंगे। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आने की संभावना है, क्योंकि अतीत में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के अनिवार्य गायन को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस होती रही है। केंद्र सरकार का तर्क है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रतीकों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है और कानून इसमें स्पष्टता लाने का कार्य करेगा।
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