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व्हाइट हाउस ने विदेशी छात्रों के लिए नए वीजा नियमों को दी हरी झंडी: जानें भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 12:11 am
अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' नियम में बदलाव की तैयारी है, जिससे भारतीय छात्रों की पढ़ाई और वहां रुकने की अवधि पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
वाशिंगटन से आ रही ताजा खबरों के अनुसार, व्हाइट हाउस ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा नियमों को और सख्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जो बाइडन प्रशासन ने उन प्रस्तावित नियमों को मंजूरी दे दी है जो विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में रुकने की समय सीमा को सीमित कर सकते हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ने की संभावना है, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
अब तक, अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्र (F-1 वीजा धारक) 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) के तहत वहां तब तक रह सकते थे जब तक उनका शैक्षणिक कार्यक्रम जारी रहता था। इसमें समय की कोई निश्चित सीमा नहीं होती थी। हालांकि, नए नियमों के तहत इस व्यवस्था को समाप्त कर छात्रों के लिए एक निश्चित 'एंड डेट' या समाप्ति तिथि निर्धारित की जा सकती है। यदि छात्र अपना कोर्स समय पर पूरा नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें वीजा विस्तार के लिए फिर से आवेदन करना होगा, जो एक जटिल और खर्चीली प्रक्रिया हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय छात्रों के लिए प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ेंगी। भारत वर्तमान में अमेरिका को छात्र भेजने वाले शीर्ष देशों में शामिल है। यदि वीजा की अवधि सीमित की जाती है, तो शोध (Research) करने वाले या पीएचडी के छात्रों को विशेष रूप से कठिनाई होगी, क्योंकि उनके प्रोजेक्ट्स अक्सर अनुमानित समय से अधिक खिंच जाते हैं। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि छात्रों के बीच अनिश्चितता का माहौल भी पैदा होगा।
यह घटनाक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर छात्र प्रवास (Student Migration) के प्रति देशों के बदलते नजरिए को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी अपनी नई प्रवासन रणनीति (Migration Strategy) के तहत छात्र वीजा नियमों को कड़ा किया है। ऑस्ट्रेलिया ने 'जेनुइन स्टूडेंट टेस्ट' को और सख्त बनाया है और अंग्रेजी भाषा की आवश्यकताओं को बढ़ा दिया है।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों में भारतीय छात्रों की भारी तादाद है। इन देशों द्वारा नियमों को सख्त किए जाने के पीछे मुख्य उद्देश्य प्रवासन प्रणाली में सुधार करना और वीजा के दुरुपयोग को रोकना है। हालांकि, भारतीय परिवारों के लिए जो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजते हैं, यह बदलाव अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और भविष्य की असुरक्षा लेकर आया है। छात्रों को अब सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पढ़ाई की समय सीमा को लेकर अधिक सतर्क रहें और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेते रहें।
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