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NEET विवाद: सरकार को चेतावनी, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लें वरना फिर शुरू होगा देशव्यापी आंदोलन
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 10:36 am

सेंटर फॉर जस्ट पीस (CJP) ने सरकार पर NEET आंदोलन खत्म करने वाले समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है और FIR वापस न लेने पर दोबारा प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। सेंटर फॉर जस्ट पीस (CJP) ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारी छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) वापस नहीं ली गईं, तो देश एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का गवाह बनेगा। CJP का आरोप है कि सरकार ने उस समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके आधार पर छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित किया था।
गौरतलब है कि इस साल आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और विसंगतियों को लेकर पूरे भारत में हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय सरकार और प्रदर्शनकारी समूहों के बीच एक सहमति बनी थी, जिसके बाद आंदोलन को शांत किया गया था। CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन अब इन वादों से मुकरा जा रहा है।
संगठन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि कई राज्यों में छात्रों और छात्र नेताओं के खिलाफ दर्ज की गई FIR अभी भी प्रभावी हैं, जिससे उनके भविष्य और करियर पर तलवार लटक रही है। CJP ने इसे 'विश्वासघात' करार देते हुए कहा कि यदि आगामी कुछ दिनों के भीतर इन कानूनी कार्यवाहियों को रद्द नहीं किया गया, तो वे फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख शहरों में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों के बच्चे भारत में मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बनाते हैं या उनके रिश्तेदार इस परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। भारतीय शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और स्थिरता का सीधा असर प्रवासी भारतीयों के निवेश और उनके बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ता है।
ICN24 से बात करते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह के गतिरोध से न केवल छात्रों का मनोबल गिरता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की परीक्षा प्रणाली की साख भी प्रभावित होती है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब तक छात्रों को कानूनी सुरक्षा नहीं दी जाती, तब तक सुधारों की कोई भी बात बेमानी है। फिलहाल, सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह CJP की मांगों को स्वीकार कर टकराव टालती है या फिर देश में एक और छात्र आंदोलन की शुरुआत होती है।
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