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आज का श्लोक: विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने वाला व्यक्ति ही सच्चा ज्ञानी

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 01:01 pm
आज का श्लोक: विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने वाला व्यक्ति ही सच्चा ज्ञानी

विदुर नीति का यह श्लोक बताता है कि सर्दी-गर्मी, सुख-दुख और अमीरी-गरीबी में समान भाव रखने वाला व्यक्ति ही वास्तव में बुद्धिमान और सफल होता है।

भारतीय दर्शन और नीति शास्त्र के ग्रंथों में जीवन को संतुलित तरीके से जीने के लिए अमूल्य सूत्र दिए गए हैं। महाभारत काल के महान कूटनीतिज्ञ महात्मा विदुर द्वारा रचित 'विदुर नीति' का एक प्रसिद्ध श्लोक आज के इस प्रतिस्पर्धी युग में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना वह सदियों पहले था। यह श्लोक व्यक्ति के चारित्रिक बल और मानसिक दृढ़ता की परिभाषा तय करता है। संस्कृत का यह मूल श्लोक है: 'यस्य कृत्यं न विघ्नन्ति शीतमुष्णं भयं रतिः। समृद्धिरसमृद्धिर्वा स वै पण्डित उच्यते॥' इसका सरल हिंदी भावार्थ है कि जिस व्यक्ति के कार्यों में सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, संपत्ति अथवा दरिद्रता जैसी विपरीत स्थितियां बाधा नहीं डालतीं, वही वास्तव में ज्ञानवान या विवेकशील कहलाता है। यहाँ 'पण्डित' शब्द का अर्थ केवल किसी जाति या शास्त्र के ज्ञाता से नहीं, बल्कि उस प्रज्ञावान व्यक्ति से है जो अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच, यह श्लोक हमें मानसिक संतुलन का महत्व सिखाता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर दो संस्कृतियों और भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास करते हैं, यह सीख अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी जीवन में कई बार आर्थिक उतार-चढ़ाव (समृद्धि-असमृद्धि) और नई परिस्थितियों का भय मन को विचलित करता है। लेकिन विदुर नीति कहती है कि जो व्यक्ति इन बाहरी कारकों से प्रभावित हुए बिना अपना कर्तव्य निभाता रहता है, वही सफल होता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह श्लोक 'इमोशनल इंटेलिजेंस' यानी भावनात्मक बुद्धिमत्ता की बात करता है। जो व्यक्ति अत्यधिक खुशी में अहंकारी नहीं होता और कठिन समय में धैर्य नहीं खोता, वह समाज और कार्यस्थल दोनों जगह सम्मान पाता है। सिडनी, मेलबर्न या पर्थ जैसे शहरों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) बनाए रखने में यह दर्शन मार्गदर्शक का काम कर सकता है। अंततः, यह श्लोक हमें आत्म-अनुशासन की प्रेरणा देता है। प्रतिकूल जलवायु हो या आंतरिक डर, यदि संकल्प शक्ति मजबूत है तो कोई भी बाधा हमें हमारे पथ से नहीं डिगा सकती। सच्ची विद्वत्ता इसी में है कि हम अपनी इंद्रियों और भावनाओं पर नियंत्रण रखें और अपने नियत कर्म को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न करें।
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