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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और विवाह पर HRFP का बड़ा कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 03:56 am
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और विवाह पर HRFP का बड़ा कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

फैसलाबाद में मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म-परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाई और कानूनी सुरक्षा की मांग की।

फैसलाबाद, पाकिस्तान: 'ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान' (HRFP) ने हाल ही में 'ताइवान फाउंडेशन फॉर डेमोक्रेसी' (TFD) के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू और ईसाई समुदायों की लड़कियों के साथ हो रहे गंभीर मानवाधिकार हनन की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था। बैठक में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म-परिवर्तन और जबरन निकाह की बढ़ती घटनाओं पर गहन चिंता व्यक्त की गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की कम उम्र की लड़कियां सबसे अधिक असुरक्षित हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हर साल सैकड़ों लड़कियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और फिर उन्हें इस्लाम स्वीकार करने और अपहरणकर्ताओं से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है। HRFP के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्थानीय कानूनी तंत्र और पुलिस अक्सर इन मामलों में पीड़ितों की मदद करने के बजाय अपराधियों का पक्ष लेते हैं, जिससे न्याय की उम्मीद कम हो जाती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है। प्रवासी भारतीयों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया है। ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक देशों में रह रहे मानवाधिकार समर्थक मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं न केवल पाकिस्तान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन हैं। चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि जबरन धर्म-परिवर्तन को रोकने के लिए पाकिस्तान में सख्त कानूनों की भारी कमी है। हालांकि समय-समय पर विधेयक पेश किए गए हैं, लेकिन कट्टरपंथी समूहों के दबाव में उन्हें वापस ले लिया जाता है या ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वे पाकिस्तान सरकार पर दबाव डालें ताकि वह अपने संविधान के तहत अल्पसंख्यकों को दी गई सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करे। अंत में, HRFP ने घोषणा की कि वे इन पीड़ितों के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएंगे। उन्होंने मांग की कि बाल विवाह और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए ताकि अल्पसंख्यक समुदायों में सुरक्षा की भावना लौट सके।
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