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अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद: सुप्रीम कोर्ट से एफआईआर दर्ज करने और निगरानी में जांच की मांग

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 09:01 pm
अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद: सुप्रीम कोर्ट से एफआईआर दर्ज करने और निगरानी में जांच की मांग

अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे के प्रबंधन और उसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक प्रतिवेदन (Representation) प्रस्तुत किया गया है, जिसमें इस पूरे मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और अदालत की सीधी निगरानी में जांच कराने के निर्देश देने की मांग की गई है। यह कानूनी कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिनमें चंदे के संग्रह और उसके उपयोग में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से करोड़ों लोगों ने श्रद्धापूर्वक दान दिया है, ऐसे में इसकी शुचिता बनाए रखने के लिए एक निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। प्रतिवेदन में विशेष रूप से ट्रस्ट द्वारा की गई कुछ भूमि खरीद और वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठाए गए हैं, जिन्हें लेकर पहले भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छिड़ चुकी है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले हज़ारों प्रवासी भारतीयों (NRIs) ने राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े स्तर पर दान दिया था। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न हिंदू संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं ने इस सांस्कृतिक परियोजना में अपनी आस्था व्यक्त की थी। अब चंदे से जुड़े विवादों की खबरों ने प्रवासी समुदाय के बीच भी चिंता और जिज्ञासा पैदा कर दी है, क्योंकि वे इस परियोजना को अपनी सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रतीक मानते हैं। विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस प्रतिवेदन को स्वीकार करता है, तो यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। फिलहाल, अदालत ने इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का जोर इस बात पर है कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या हेरफेर के संदेह को दूर करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गहन जांच की जानी चाहिए। यह विवाद केवल वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं से भी जुड़ा है। राम मंदिर का मुद्दा दशकों तक कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र रहा है। अब निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद इस तरह के आरोप मंदिर प्रशासन की छवि पर प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई विशेष दिशा-निर्देश जारी करता है।
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